Thursday, August 1, 2024

गेम्स और वीडियो से सीखने वाली जैन ज़ी को हल्के में न लें

 

एन. रघुरामन का कॉलम:गेम्स और वीडियो से सीखने वाली जैन ज़ी को हल्के में न लें

2 दिन पहले

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चलने वाली राजधानी इस सोमवार को मुंबई से तय समय से चार मिनट की देरी से छूटी, लेकिन इसने तुरंत गति पकड़ते हुए ज्यादातर जगहों पर इसे बरकरार रखा। मेरे सहयात्री ने नजरें उठाकर देखा भी नहीं।


वे लोग इंजन-बोगी पर बात करने में व्यस्त थे। एक कह रहा था, “ये सबसे लंबा इंजन है।’ दूसरे ने कहा, “नहीं। वैग 12 ही सबसे लंबा इंजन है।’ अगले एक घंटे में मैंने कई नए शब्द सुने जैसे डब्ल्यूडीजी-थ्रीए, वैप-7, वैप-4 (अलग-अलग इंजन), इसमें वंदे भारत के इंजन-कोच के नाम भी थे जैसे उत्कृष्ट, आईसीएफ रेड, क्लासिक-एस (शताब्दी का इंजन), क्लासिक-आर (राजधानी कोच)। वे बात कर रहे थे कि किस वैगन में पशुओं को लाया ले जाता है।


उनकी बातें सुनकर मैं हक्का-बक्का था। वो इसलिए क्योंकि फर्स्ट एसी की उन दोनों सीटों पर बैठे वो लोग किसी को देख तक नहीं रहे थे। वे दोनों थे 12 वर्षीय अहान सक्सेना व दस वर्षीय उसका भाई विहान, जो कतर के बिड़ला पब्लिक स्कूल में कक्षा सातवीं व छठवीं के स्टूडेंट हैं। वे अपनी मां गरिमा के साथ यात्रा कर रहे थे।


कतर में पले-बढ़े होने के बावजूद, दोनों भाई भारतीय रेलवे की हरेक चीज जानते थे क्योंकि उन्होंने पूरे रेलवे की गाड़ियां चलाई हैं! आप ताज्जुब कर रहे होंगे कैसे? वे इंडियन रेलवे सिमुलेटर नाम का फ्री वीडियो गेम खेलते हैं, इसे टीम हाइकर्स ने डेवलप किया है, जहां ये भारतीय रेलवे सिस्टम की नकल करता है।


इससे ट्रेन चला सकते हैं। हर केबिन में वास्तविक जानकारी होती है और जब ट्रेन चलाते हैं तो थरथराने वाली ट्रैक की आवाज भी आती है। पहली नजर में देखने पर यह अच्छा गेम लगता है। हालांकि गेम खेलने वालों का अनुभव कुछ और कहानी कहता है।


बाकी खेलों की तरह इसमें कोई मिशन नहीं है, जहां विरोधी को मार गिराना होता है। इस तरह यह आपके गेमप्ले को केवल ट्रेन चलाने तक सीमित कर देता है। लेकिन भारत की भूगोल के बारे में एक गहन जानकारी देता है।


वे यही नहीं रुके। वे ज्यादातर स्टेशनों के नाम जानते थे और जैसे ही ट्रेन मुंबई पार करके माथेरान पहुंचने को थी, बड़ा भाई अहान बताने लगा कि कैसे ये हिल स्टेशन दिसंबर 2001 में हुए भीषण हत्याकांड के लिए भी जाना जाता है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, इसमें पति ने पत्नी की हत्या करके उसका सिर कटा शरीर होटल के बाथरूम में छोड़ दिया था।


ना सिर्फ माथेरान के अपराध बल्कि वे बच्चे अमेरिका से लेकर भारत तक में हुई ज्यादातर आपराधिक वारदातों के बारे में जानते थे, क्योंकि वे रे विलियम जॉनसन के बनाए कार्यक्रम देखते हैं, जो सोशल मीडिया पर क्राइम शोज़ लेकर आए।


दिलचस्प रूप से जब मैंने उनसे हवाई यात्राओं का पूछा, तो उन्हें हर तरह के एयरक्राफ्ट, इंजन पावर, साइज, यात्री क्षमता, उसके निर्माणकर्ता का नाम भी मालूम था। उनकी मां मुझे बता रही थीं कि किसी भी यात्रा पर जाने से पहले, बच्चे गूगल करते हैं, साइट सीइंग करते हैं और वर्चुअल स्पेस में उपलब्ध ज्ञान का हर टुकड़ा सहेजते हैं।


फिर वे वास्तविक जीवन में अपने अनुभव से उसे जोड़ते हैं। सच कहूं तो वे भी मोबाइल किड्स थे, लेकिन केवल तब, जब वे ऐसी जानकारी खोजना चाहते थे जो उन्हें रुचि के चुने हुए क्षेत्र में बुद्धिमान बना सके। गर्व से भरी उनकी मां ने कहा कि इंटरनेट पर कुछ भी करने से मैं उन्हें नहीं रोकती, हां, बस इसका ध्यान रखती हूं कि सब कुछ मेरी आंखों के सामने हो।


फंडा यह है कि अगर जेन ज़ी किताबें नहीं छू रही है, तो पढ़ने के लिए उन पर दबाव न बनाएं, बस उनकी उत्सुकता बनाए रखने के तरीके ईजाद करें और हर चीज जानने की भूख पैदा करें। क्या फर्क पड़ता है, अगर वे मोबाइल गेम्स या सोशल साइट से सीख रहे हैं, आखिरकार यह ज्ञान ही तो है।

Thursday, June 27, 2024

एन. रघुरामन का कॉलम:अगर आप एक बेहतरीन एमबीए हैं तो कभी जॉबलेस नहीं रहेंगे!


कल्पना करें कि आप एक पिज्जा कंपनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू दे रहे हैं। एचआर आपसे पूछते हैं कि ‘इस बात की बढ़ती जागरूकता के साथ कि प्रत्येक पिज्जा में 3,500 से ज्यादा कैलोरी होती हैं, जो कि प्रति भोजन 600 कैलोरी की सामान्य संख्या से कहीं ज्यादा है, आपको क्या लगता है हम अपनी बिक्री कैसे बढ़ा सकते हैं?’ और आप तुरंत कहते हैं, ‘क्या मैं आपको एक लंबा जवाब दे सकता हूं?’ और जब एचआर सिर हिलाता है, तो आप कहना शुरू करते हैं, ‘विस्तार ही एकमात्र रास्ता है।वर्तमान में खाद्य सेवाओं की इंडस्ट्री करीब 41 ट्रिलियन रु. की है। इसमें से 1.2 ट्रिलियन संगठित हैं। उसमें पिज्जा उद्योग केवल 8,300 करोड़ का है और पिज्जा बाजार में सभी 15 प्रमुख प्लेयर्स में से प्रत्येक के पास कम से कम 100 आउटलेट्स हैं। इसमें डोमिनोज़ का हिस्सा सबसे ज्यादा है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसकी योजना 4000 आउटलेट्स के साथ दादरी, सुल्तानपुर और यहां तक कि बदायूं जैसे छोटे शहरों में भी पहुंचने की है, जहां लोग रिश्तेदारों के साथ कुछ खाने और जश्न मनाने के लिए आते हैं। वे उन लोगों को, विशेषकर ग्रामीणों को 99 रुपए में एक सादा पिज्जा देते हैं, जो जानना चाहते हैं कि यह डिश आखिर क्या है।

फिर वे धीरे-धीरे उन्हें नॉलेज और ऑफरिंग्स के साथ अपग्रेड करते चलते हैं और अंत में 999 रुपए का पिज्जा बेचने में भी कामयाब हो जाते हैं। डिलीवरी से उनकी 68% कमाई होती है और डाइन-इन और टेकअवे से 32%। डोमिनोज़ बेंगलुरू से शुरू हुए 20 मिनट में डिलीवरी वाले कॉन्सेप्ट पर काम कर रहा है, जहां एक बड़ी युवा आबादी है जो हर अवसर पर पिज्जा खाती है।

क्षमा करें सर, मेरा जवाब थोड़ा लंबा हो गया। लेकिन मैं इस बढ़ते हुए उद्योग का हिस्सा बनने के लिए बहुत उत्सुक हूं।’ मेरा विश्वास करें यदि आपने इस तरह उत्तर दिया है, तो एचआर का अगला सवाल होगा, ‘आप कब से जॉइन कर सकते हैं? वैसे, एमबीए में आपके प्रोफेसर कौन थे?’

मैंने भी ठीक यही कहा था, जब किसी ने मुझसे पूछा कि क्या 2024 में एमबीए करना उचित है? उद्योग के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों ने एमबीए को मृत घोषित कर दिया है, जिनमें मैं भी शामिल हूं। मैंने हाल ही में डिजिटल भास्कर पर कहा कि इस साल एमबीए वालों को नौकरी के अवसर कम मिले हैं। लेकिन मेरा सवाल यह था कि क्या आप जिस श्रेणी में आवेदन कर रहे हैं, उसमें सर्वश्रेष्ठ हैं? मैं 50 वर्षीय डॉ. एलेक्जेंड्रा फ्रीमैन का उदाहरण देना चाहता हूं, जो यूके में हाउस ऑफ लॉर्ड्स की नवीनतम सदस्य हैं।

वर्ष 2000 से इस कार्यक्रम को ‘पीपुल्स पीयर्स’ कहा जाता है, जो सर्वश्रेष्ठ मेधावियों का चयन करते हैं। डॉ. फ्रीमैन को लगा कि वे इस पद के लिए उपयुक्त हैं और उन्होंने आवेदन कर दिया। एक साल तक कोई जवाब नहीं आया और उन्हें लगा कि उनका आवेदन कूड़ेदान में चला गया है।

इस कार्यक्रम के लिए साल में केवल दो लोगों की नियुक्ति होती है और पूरे देश से मिलने वाले 5,600 आवेदनों के साथ यहां कर्मचारी बनने वाले आवेदकों की सफलता दर केवल 1.3% है। लेकिन आज डॉ. फ्रीमैन का काम वैज्ञानिक डेटा और चिकित्सा संबंधी जोखिमों को सरल प्रारूप में सर्वोच्च अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करना है।

कोई भी विश्वविद्यालय पढ़ने की आदत की भरपाई नहीं कर सकता। यदि आप एमबीए हैं, तो स्टडी करते समय भी पढ़ें और काम करते समय भी, ताकि अपने आपको आंकड़ों और ताजा-तरीन घटनाओं के साथ दैनिक आधार पर अपग्रेड कर सकें।

फंडा यह है कि यदि आप अपने पेशे में बेजोड़ और अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ हैं, तो हाउस ऑफ लॉर्ड्स भी आपको काम पर रखेगा, जबकि पिज्जा आउटलेट आपका इंतजार करता रहेगा!

Apne patni k swabhav ko Jane

 पीयूष ने कहा, "अंकल, आज शाम 6.30 बजे का शो है, मैंने ऑनलाइन टिकट बुक कर लिए हैं। शाम 5.30 बजे ऑफिस से निकलकर उसे लेने जाऊंगा और सीधे थिएटर चला जाऊंगा।' उनकी बात सुनकर डॉ. सुरेश ने कहा, "अब मैं जो कहूंगा, वही करोगे?' पीयूष मना नहीं कर सकते थे, क्योंकि डॉ. सुरेश उनके पिता के सबसे अच्छे दोस्त थे। इसलिए उन्होंने बस सिर हिला दिया।


डॉ. सुरेश ने आगे कहा, "शाम 5.30 बजे अपना मोबाइल फोन बंद कर दो और शाम 6.30 बजे तक बंद रहने दो। शाम 6.30 बजे अपना मोबाइल चालू करो और चारु को फोन करो। उससे कहो कि कुछ जरूरी कारणों से तुम्हें फिल्म देखने जाना रद्द करना पड़ा और माफी मांगो।


रात 8 बजे से पहले घर नहीं जाना। घर पर तुम्हारा जिस तरह से अभिवादन किया जाएगा, वह उसके स्वभाव को परखने का थर्मामीटर होगा। टिकट की कीमत की चिंता मत करो, वो मैं दे दूंगा। लेकिन कल तक उसे इस आइडिया के बारे में मत बताना।'

Friday, May 3, 2024

There is nothing for free

 ज्यादा से ज्यादा हुनर सीखें, अपने सीखने में मूल्यों को शामिल करें, दुनिया को बेहतर तरीके से जानें, वैकल्पिक नई नौकरी की भूमिकाएं जानें, जिनमें आप फिट हो सकते हैं और संक्षेप में अपने और अपने कौशल की बेहतर कीमत पाने के लिए खुद को और कीमती बनाएं। इससे आप इतने संपन्न हो जाएंगे कि कल को मुफ्त की चीजें बंद भी हो जाएं तो कनेक्टिविटी जैसी चीजें पैसे देकर भी ले सकेंगे। फिजूल के वीडियोज या इंस्टा पर रील्स स्क्रॉल करने में डाटा और कीमती वक्त न गंवाएं।

फंडा यह है कि जीवनभर कुछ भी फ्री या सब्सिडी पर नहीं मिलता रहेगा। आकस्मिक योजना रखें कि यदि मुफ्त की चीजें अचानक बंद हो जाएं तो उन जरूरतों की पूर्ति कैसे करेंगे।

Bachpan ko kaise jiye

 


क्या आप चाहते हैं कि बच्चा बिस्तर से उछलकर उठे और स्कूल जाए? जवाब आसान है। उन्हें जड़ों से जोड़ें। न्यूयॉर्क शहर से 17 किमी दूर, मोंटक्लेयर नामक जगह यही कर रही है। उन्होंने बच्चों की छोटी साइकिलों को ‘बाइक बस’ नाम दिया है, जो पीले रंग के कारण बस जैसी दिखती हैं।Ads by

बच्चे बीच शहर की एक तय जगह से 3.5 किमी दूर स्कूल जाते हैं। चूंकि बच्चे अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, इसलिए वे पहले एक जगह इकट्ठा होते हैं। फिर यहां से वे ‘बाइक बस’ से 20 मिनट के सफर पर निकलते हैं।

शुरुआत में वे हफ्ते में एक दिन ऐसा करते है। इस पहल के ज़रिए माता-पिता को लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में स्थायी बदलाव की राह खुलेगी और शहर में बेहतर क्रॉसवाक, बाइक के लिए अलग लेन बन पाएंगी और ऐसा समय या दिन तय किए जा सकेंगे जब मोटर गाड़ियां न चलें।

बाइक बस का आइडिया बार्सिलोना, स्पेन में भी है। साल 1960 में कम से कम 50% अमेरिकी छात्र साइकिल से स्कूल जाते थे। ये आंकड़ा 2009 में गिरकर 13% हो गया और 2024 में इसके एक अंक में पहुंचने का अंदेशा है।

गिरावट के पीछे माता-पिता का डर है कि मौजूदा ट्रैफिक में बच्चों के लिए साइकिल से या पैदल जाना असुरक्षित है। इसलिए अब बच्चों को साइकिल से स्कूल भेजकर, अमेरिकी कोशिश कर रहे हैं कि उनके बच्चे, बचपन को भरपूर जिएं। अमेरिकी ‘लाइसेंस्ड प्ले थेरेपिस्ट’ पर भी खर्च कर रहे हैं।

यह अमेरिकी स्कूलों में मशहूर पद है, जिसे हमारे माता-पिता और स्कूल प्रबंधन को देखना चाहिए। प्ले थेरेपिस्ट समझाते हैं कि बचपन के खेल या गेम्स का युवा जीवन पर कितना गहरा असर होता है। याद कीजिए, हम स्कूल से लौटते थे, यूनिफॉर्म बदलते थे, मां जो देती थीं वह खाते थे और फिर हमसे कहा जाता था कि बाहर जाकर खेलो लेकिन रात के खाने से पहले लौट आना। तब देखने के लिए स्क्रीन नहीं थी, दूरदर्शन तक नहीं।

कुछ घरों में रेडियो थे, लेकिन उसे बड़े ही सुनते थे। लेकिन अगर मैं पूछूं कि हम कौनसे खेल खेलते थे, तो शायद सभी याद न आएं। क्योंकि हम सिर्फ मज़े के लिए खेलते थे। ये प्ले थेरेपिस्ट आज सिखा रहे हैं कि गलतियां करो और खुद उनसे सीखो। अरे हम यही तो करते थे। हमारे खेलों का कोई तय खाका नहीं था।

ये खेल बच्चों के या कभी-कभी माता-पिता के निर्देशों पर चलते थे। फिर भी इनसे आत्मविश्वास, संवाद कौशल, रिश्ते सुधारने की क्षमता और समुदाय से जुड़ने की सीख मिलती थी। ये खेल एंग्जायटी की दवा की तरह थे।

आज माता-पिता चीजों को जटिल कर रहे हैं। वे बच्चों के जीवन में दखल देने के नए तरीके तलाशते रहते हैं। वे बच्चे के शेड्यूल या डेली टाइम टेबल में खाली समय नहीं रखते। ऐसा समय जब वे बाग में दौड़ सकें, टूटी शाख बटोर सकें, किसी क्रिकेटर या हॉकी प्लेयर जैसे एक्ट कर सकें। याद है, हममें से कुछ लोग समुद्री तटीय शहरों में पले-बढ़े हैं, जहां हम सीपियां बटोरते थे, जो हमें फिर नहीं दिखीं।

कृपया काम के बाद फोन अलग रखें और बच्चों के साथ ऐसे खेलों की ओर लौटें जिनमें दिमाग लगाने की जरूरत न हो। कुछ सीपियां खोजें और दो एक-सी सीपियां मिलने पर जोर से चीखें। ऐसे बिना नियम वाले खेलों से ही बच्चा बचपन को भरपूर जी पाएगा।

फंडा यह है कि बच्चों को गलतियां करने दें और उनसे सीखने दें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे गलतियां कर पाएं, इसके लिए उन्हें आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित माहौल दें। ऐसा माहौल हमारे खेलने के और स्कूल जाने के पुराने तरीकों से भी दिया जा सकता है।

डार्क कहानियां भी पढ़ना-जानना जरू


अब तो चोरियां भी सफाई के मामले में अलग मुकाम पर पहुंच गई हैं! यहां एक ऐसी लूट की कहानी है जो कई बड़ी कंपनियों की नाक के नीचे हो रही थी और वे इससे अनजान थे क्योंकि इसे खुद कंपनी के कर्मचारी कर रहे थे।


ब्रिटेन में कर्मचारियों द्वारा पिछले एक साल में तकरीबन 3.3 अरब पाउंड (34 हजार करोड़ रु.) की कीमत की चोरी हुई। बोल्टन, ब्रिटेन में मैनचेस्टर के करीब एक जगह है जहां एक हजार कर्मचारी एमेजॉन के रोबोट-संचालित गोदाम में ऑर्डर लेते व पैक करते हैं। यहां कन्वेयर बेल्ट 8 किमी लंबे हैं।


आप समझ गए होंगे कि यहां किस स्तर पर काम होता है। 25 वर्षीय अरबाज जफर वहां काम करता था। उसकी तरह तमाम कर्मचारियों की अंदर-बाहर जाने पर चेकिंग होती है। वह एक पिन भी अंदर या बाहर नहीं ला सकता क्योंकि चौबीसों घंटे कैमरे की नजर रहती है। फिर भी उसे दिसंबर व फरवरी के बीच गोदाम से 46 आईफोन चुराने का दोषी पाया गया और कोर्ट में सजा सुनाई गई।


सिर्फ वही नहीं, पिछले महीने तीन अन्य स्टाफ को गोदाम से 78.75 लाख रु. के स्मार्टफोन व इलेक्ट्रॉनिक्स चोरी करते हुए पकड़ा गया! खुद जफर ने बिना सुराग छोड़े 67,75,860 रु. कीमत के आईफोन चुराए।


आप जानने को बेताब होंगे कि चोरी करने का यह कौन-सा तरीका है, आगे पढ़ें। वे लोग अपने लिए किताब जैसी छोटी चीज ऑर्डर करते थे, फिर पैकेजिंग में आईफोन रख देते थे और अपने घर के पते का लेबल लगा देते थे। बस उन्होंने एक गलती की कि अपने असली घर का पता लिख दिया।


जफर के घर की तलाशी में एमेजॉन के पैकेट्स और 26.25 लाख रु. नकद मिले। रीटेल स्टोर्स को चोरी से बचने के लिए सुरक्षा व टेक्नोलॉजी पर भारी खर्च करना पड़ता है, फिर भी कई दुकानों से चोरी में 49 हजार करोड़ रु. का नुकसान हुआ।


इसमें 34 हजार करोड़ का नुकसान तो सिर्फ कर्मचारियों द्वारा की गई चोरी से हुआ। मार्क एंड स्पेंसर, क्रिस्टियां डियॉ, नेक्स्ट और यहां तक कि हैरड्स जैसे स्टोर में भी कर्मचारियों को खुद को क्रेडिट नोट जारी करते हुए, या अपने लिए लाखों के हैंडबैग-आफ्टरशेव चोरी करते देखा गया।


ये कैसे हो रहा है? क्योंकि, इस लूट में एक और पेंच है। हम भलीभांति जानते हैं कि कई स्टोर्स में स्थाई भुगतान में कटौती करने के लिए गिग वर्कर (अस्थायी कर्मचारी) रखना आम बात हो गई है, जिन्हें पीएफ या हेल्थ जैसी बाकी दुर्घटनाओं में कोई इंश्योरेंस का फायदा नहीं देना पड़ता।


गिग कामगारों को रखते समय कई कंपनियां भी बैकग्राउंड चेक करना छोड़ देती हैं क्योंकि उन्हें भी काम के दबाव को कम करने के लिए वे कर्मचारी एक दिन या कुछ हफ्तों के लिए चाहिए होते हैं। ऐसे अपराधों का अध्ययन करने वाले सुरक्षा विशेषज्ञों और अकादमिक अध्ययनकर्ताओं को लगता है कि इन गिग कर्मचारियों की सप्लाई, चोरी आदि का विधिवत प्रशिक्षण देने के बाद संगठित माफिया करते हैं।


इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने से वितरण केंद्रों पर कर्मचारियों द्वारा चोरी की वारदातें नाटकीय गति से बढ़ी हैं। विक्रेता खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं, वे कर्मचारियों की जांच करने में विफल रहते हैं, नतीजतन गिरोह सप्लाई चेन में सेंधमारी करने में सफल हो जाते हैं।


अमेरिका जैसे देशों में लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में काम करने वाले हर व्यक्ति को ऐसी डार्क कहानियां बताई जाती हैं, ताकि वे भी ऐसे कोई सेंधमारी पकड़ सकें। यह वितरण व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को अलर्ट रखता है।


फंडा यह है कि एक पेशेवर के रूप में यदि आप वास्तविकता से बचते हैं (समाज में होने वाली घटनाएं, वह भी आपके क्षेत्र में) तो फिर उसके परिणामों से नहीं बच सकते।

Saturday, March 23, 2024

Business kaise aage badhaye

 जिसमें व्यक्ति को सीखना होता है कि ट्रेंड्स क्या हैं, मुझे डोमेन की गहरी जानकारी है या नहीं, ग्राहक कैसे मिलेंगे, निवेश के लिए किसे आगे बढ़ाना है या किसके साथ ब्रांड और मार्केटिंग करनी चाहिए, ऑनलाइन बेचना चाहिए या दुकान से दुकान तक, और जमीनी हकीकतों का कैसे बेहतर तरीके से सामना करें।

Naukri kaise khoje

 मैं हमेशा सलाह देता हूं कि अगर आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो यह तलाश भी अपने आपमें एक काम ही है। हर 30 मिनट या एक घंटे में किसी नई कंपनी के लिए आवेदन करते रहना चाहिए और एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए कि एक दिन में कितने आवेदन करें; प्रत्येक आवेदन का मानक क्या हो; नियोक्ता का ध्यान आकर्षित करने के लिए आवेदन की यूएसपी क्या होनी चाहिए। इसी तरह, किसी को दूसरों के व्यवसाय और उनकी सफलता के तरीकों पर भी ध्यान देना चाहिए।

Thursday, March 21, 2024

Happiness khushi

 रिसर्च में साबित हुआ है कि खुशियों और गिविंग के बीच सकारात्मक संबंध से भावनात्मक-शारीरिक सेहत सुधरती है, तनाव वाले हॉर्मोन में भी कमी आती है। आज से ही देना शुरू करें- किसी अजनबी को कम से एक मुस्कुराहट और साथी की सराहना तो कर ही सकते हैं।सड़कों पर भीड़भाड़ में, फुटपाथ पर, मजार, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन पर उनकी निगाह रही, जहां लापता लोगों के मिलने की संभावना ज्यादा होती है।

Wednesday, March 20, 2024

कुछ माता-पिता को लगता है कि बच्चों के सामने ‘बड़ों की बातें’ जैसे रुपयों-पैसों के मामलों पर चर्चा नहीं करके वे कोई अच्छा काम कर रहे हैं। पर सच्चाई ये है कि ऐसे मुद्दों को टालकर वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ‘वित्तीय अनभिज्ञता’ सौंप रहे हैं, जो कि आगे चलकर पैसों का और ज्यादा तनाव पैदा करेगी।

 मैंने टैक्सस स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा 60 बच्चों पर किए एक अध्ययन के बारे में पढ़ा, जिसमें पाया गया कि बच्चों से परिवार के आर्थिक हालात के बारे में चर्चा करने से लंबी अवधि में उनकी मानसिक सेहत मजबूत रहती है। ‘फिलहाल वह हमारे बजट में नहीं है।’अध्ययन में सामने आया कि कैसे बेटियों को बचत से जुड़ी बात ज्यादा समझ में आती है तो बेटों को कमाई से जुड़ी बातकुछ माता-पिता को लगता है कि बच्चों के सामने ‘बड़ों की बातें’ जैसे रुपयों-पैसों के मामलों पर चर्चा नहीं करके वे कोई अच्छा काम कर रहे हैं। पर सच्चाई ये है कि ऐसे मुद्दों को टालकर वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ‘वित्तीय अनभिज्ञता’ सौंप रहे हैं, जो कि आगे चलकर पैसों का और ज्यादा तनाव पैदा करेगी।

Sunday, March 17, 2024

Banana kela

 

एन. रघुरामन का कॉलम:ईश्वर का यह उपहार हमारी सेहत और बटुए दोनों के लिए अच्छा है!

1 दिन पहले
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

केवल एक फिल्म ने पूरे साल पुरस्कार कार्यक्रमों में दबदबा बनाए रखा था और ऑस्कर भी अपवाद नहीं रहा। क्रिस्टोफर नोलन के निर्देशन में बनी ओपेनहाइमर ने सात ऑस्कर जीते। जब मैं कुछ समय पहले 180 मिनट 9 सेकंड लंबी यह फिल्म देख रहा था तो मैंने पाया लोग एक के बाद एक पॉपकॉर्न बकेट ऑर्डर कर रहे थे।

ब्रेक के दौरान मैंने कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने ऐसा करने के कई कारण बताए। जैसे तली हुई चीजों की तरह उनका अस्वास्थ्यकर नहीं होना और मशीनों द्वारा कॉर्न को पॉप किए जाने के कारण उनके तैयार करने में प्रक्रिया में मनुष्यों के हाथों का बहुत कम उपयोग होने से उनका हाइजेनिक होना।

उनसे बात करते समय मेरी नजर टीवी स्क्रीन पर चल रहे क्रिकेट मैच पर गई, जिसमें विराट कोहली घंटों बैटिंग करने के बाद पैवेलियन लौटने के बाद दो केले खाते दिख रहे थे। मैं खाने के काउंटर की ओर गया और केले के बारे में पूछा। काउंटर वाले ने कहा, नहीं है।

कारण पूछने पर एक लंबा स्पष्टीकरण देते हुए कहा, सर, अंग्रेजी फिल्म के लिए कई सौ रुपए देने के बाद केले कौन खरीदता है? यह उनके स्टेटस के अनुरूप नहीं है। जब मैंने उसे दिखाया कि कोहली केले का स्वाद ले रहे हैं, तो उसने मुस्कराते हुए कहा- सवाल कीमतों का है, हम सड़क पर ठेला चलाने वालों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते और लोग केले जैसे फल के लिए ज्यादा भुगतान करने को राजी नहीं होंगे।

मैं बेचारे केले के स्टेटस के बारे में उससे सहमत हुआ और चला आया।लेकिन इस शुक्रवार को जब मेरी मुलाकात जलगांव के डॉ. के.बी.पाटिल- जो कि बनाना रिवोल्यूशन के सूत्रधार हैं- से हुई और उन्होंने मुझे बताया कि यह बेचारा समझा जाने वाला केला वास्तव में कितना शानदार है तो मैं चकित रह गया।

उसके लाभों का वर्णन करते हुए पाटिल ने बताया, केला एक संपूर्ण भोजन है। उसमें सेब की तुलना में छह गुना अधिक प्रोटीन, दो गुना अधिक कार्बोहाइड्रेट, तीन गुना अधिक फास्फोरस और विटामिन ए और पांच गुना अधिक आयरन होता है। आयरन की मात्रा हीमोग्लोबिन को बढ़ाती है और एनीमिया को ठीक करती है।

चूंकि इसमें पोटेशियम की मात्रा अधिक और नमक की मात्रा कम होती है, इसलिए यह रक्तचाप को भी नियंत्रित करता है। फाइबर की मात्रा अधिक होने से इसे पचाना आसान होता है। इसके एंटी-एसिडिक गुण सीने में जलन को रोकते हैं। यह तुरंत ऊर्जा बढ़ाने वाला बहुउद्देश्यीय फल है, जिसमें सुक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज जैसी प्राकृतिक शकर होती है।

इसके पोषक तत्वों में कैल्शियम 88.0, पोटेशियम 17.0, जिंक 0.15 और विटामिन सी 7.0 शामिल हैं (सभी %मिलीग्राम में)। चलते-फिरते केले खाना बहुत आसान है, क्योंकि इसकी पैकेजिंग ईश्वर द्वारा की गई है और उसका सेवन करने वाले के अलावा कोई उसे छू नहीं सकता है।