मैंने टैक्सस स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा 60 बच्चों पर किए एक अध्ययन के बारे में पढ़ा, जिसमें पाया गया कि बच्चों से परिवार के आर्थिक हालात के बारे में चर्चा करने से लंबी अवधि में उनकी मानसिक सेहत मजबूत रहती है। ‘फिलहाल वह हमारे बजट में नहीं है।’अध्ययन में सामने आया कि कैसे बेटियों को बचत से जुड़ी बात ज्यादा समझ में आती है तो बेटों को कमाई से जुड़ी बातकुछ माता-पिता को लगता है कि बच्चों के सामने ‘बड़ों की बातें’ जैसे रुपयों-पैसों के मामलों पर चर्चा नहीं करके वे कोई अच्छा काम कर रहे हैं। पर सच्चाई ये है कि ऐसे मुद्दों को टालकर वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ‘वित्तीय अनभिज्ञता’ सौंप रहे हैं, जो कि आगे चलकर पैसों का और ज्यादा तनाव पैदा करेगी।
No comments:
Post a Comment