Thursday, December 7, 2023

मजबूत भरोसा हो तो आप कोई भी नई स्किल सीख सकते हैं

 

हिंदी पट्टी से कॉलेज आने वाले कई स्टूडेंट्स की तरह 28 वर्षीय यशोदा ने भी 12वीं की कक्षा हिंदी माध्यम से पास की थी। उत्तर प्रदेश स्थित उनके गांव कौशाम्बी का परिवेश पूरी तरह से हिंदी भाषी था। ऐसी जगहों से आने वाले छात्रों को कॉलेज में अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले विषयों को समझने में कठिनाई होती है। जबकि आज यशोदा कई ग्रामीणों को अंग्रेजी सिखा रही हैं।


उनके जैसे अधिकांश छात्रों की तरह, वह भी कभी विदेशी भाषा नहीं बोलती थीं। देश की किसी भी अन्य बहू की तरह वे बूढ़े सास-ससुर की देखभाल करती थीं, जबकि उनके पति राधे लोधी दिहाड़ी मजदूर थे। सीमित साधनों के बावजूद उनका जीवन चल रहा था कि एक दिन सबकुछ अस्त-व्यस्त हो गया।


राधे एक सड़क दुर्घटना के शिकार हुए और पैसे कमाकर परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं रह गए। यशोदा ने राधे की यह जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने का फैसला किया। और सौभाग्य से उनका स्मार्टफोन इसमें काम आया। आप सोच रहे होंगे, कैसे? तो आगे पढ़ें।


उन्होंने कंटेंट निर्माण, वीडियो एडिटिंग व ऑनलाइन आकर्षण हासिल करने के तरीके सीखने में इंटरनेट पर घंटों बिताए। उन्होंने देसी खाना पकाने, कढ़ाई, सजावट की यूट्यूब चैनलों से शुरुआत की, पर बात नहीं बनी। पर वो हार मानने वालों में से नहीं थीं। उन्होंने देखा वे जहां रहती हैं, वहां के युवाओं और उनके जैसी महिलाओं में एक बड़ा अभाव है कि वे अच्छे-से अंग्रेजी नहीं बोल पाते हैं।


तब उन्होंने उन सभी के लिए ऑनलाइन अंग्रेजी शिक्षक बनने का फैसला किया। सबसे पहले उन्होंने अपने स्मार्टफोन के जरिए यूट्यूब पर दूसरों को अंग्रेजी बोलते सुनना शुरू किया। फिर खुद किताबें पढ़ने लगीं। आज वे जेम्स क्लीयर की ‘एटॉमिक हैबिट्स’ जैसी किताबें पढ़ती हैं, जिसे अधिकांश कॉन्वेंट शिक्षित लोग भी शायद अनदेखा कर देते होंगे। लेकिन यहां एक छोटा-सा ट्विस्ट है।


वे किताबें पढ़ने के लिए सुबह 3 बजे उठ जाती हैं। जब घर के बाकी लोग उठते हैं, तो वे रसोई आदि की जिम्मेदारी सम्भाल लेती हैं, लेकिन ईयरफोन लगाकर। चूंकि उनके आसपास रहने वालों में से कोई भी अंग्रेजी नहीं बोलता या समझता था, इसलिए उनके लिए धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाला माहौल पाना कठिन था।


इसलिए वे पूरे दिन ईयरफोन लगाए रहती थीं। दूसरों की बातें ध्यान से सुनना ही उनकी सफलता की कुंजी रही है। फिर वे खुद यूट्यूब पर वीडियो बनाने और उन्हें एडिट करने लगीं। उन्होंने उन वीडियो को यह कहते हुए जारी किया कि उनका कंटेंट ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों और ऐसे अन्य लोगों के लिए है, जो उनके जैसा जीवन बिताते हैं। उन्होंने फीडबैक मांगा और धीरे-धीरे अपने काम में सुधार लाती चली गईं। आज हिंदी पट्टी में उनके सब्स्क्राइबर्स की संख्या 3 लाख से अधिक है! और यशोदा अपने चैनल से हर महीने लगभग 15 से 20 हजार रुपए कमा लेती हैं।


आप इसे पसंद करें या न करें, लेकिन हम एक वैश्वीकृत दुनिया में रहते हैं और साझा लैंग्वेज होने के कारण अंग्रेजी ही आर्थिक तरक्की के अधिकतम अवसर मुहैया कराती है। इसके अलावा, देश के ग्रामीण बाजार में अंग्रेजी सीखने की बड़ी गहरी आकांक्षा है।


जब उसी पृष्ठभूमि के यशोदा जैसे लोग इस दिशा में आगे बढ़कर लोगों को अंग्रेजी सिखाने का बीड़ा उठाते हैं तो वहां के अन्य लोग भी तुरंत इसमें जुड़ जाते हैं। जैसा कि यशोदा कहती हैं, हम सभी कोई न कोई काम बेहतर तरीके से करने में सक्षम हैं और उसे बार-बार करने से ही आत्मविश्वास आता है। इस यूट्यूब स्टार की युवाओं को सलाह है- असफलताओं से कभी हार न मानें, बल्कि उनसे सीखें और बार-बार कोशिश करते रहें।


फंडा यह है कि भगवान कृष्ण ने एक बार कहा था- जहां विश्वास है वहां मैं हूं। यशोदा ने भी खुद पर विश्वास किया, राधे ने नैतिक समर्थन उन्हें दिया और देखा कि यशोदा कहां पहुंच गई हैं। अगर आप अपने पर भरोसा करते हैं तो किसी एक चीज में महारत हासिल कर लेंगे और आपके जीवन का हर पहलू उसी के अनुरूप होता चला जाएगा।



Yah content keval information aur motivation share krne k liye kiya gya h

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