Tuesday, December 5, 2023

 आंकड़ों के पीछे छुपे शब्दों को पढ़ना सीखें

एक दिन पहले
. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जनवरी 2022 से लेकर अक्टूबर 2023 के बी3,924 एकड़ जमीन में से 44.5% का अधिग्रहण टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में हुआ। इस 44.5 फीसदी में 75% से ज्यादा जमीन नागपुर, पालघर, खालापुर, पानीपत, लुधियाना और पंचकुला की थी। इसमें से 1,461 एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त तो सिर्फ 17 सौदों में हो गई।

रीयल एस्टेट में काम करने वाले अग्रणी संस्था और इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट सर्विस देने वाली जोन्स लैंग लास्ले (जेएलएल) ने यह सर्वेक्षण किया, इसका कहना है कि यह साफ तौर पर दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और वृद्धि सिर्फ मेट्रो शहरों में नहीं टीयर-2 और टीयर-3 शहरों व कस्बों में भी दिखाई दे रही है।

जेएलएल के अनुसार बेंगलुरु और गुरुग्राम ऑफिस स्पेस खरीदने में आगे हैं। दिलचस्प है कि लोग ऑफिस स्पेस नहीं खरीद रहे। खरीदारों को स्पष्टता है कि नई जगह पर उन्हें कितनी सीटों की आवश्यकता है। कॉलियर्स फिक्की की रिपोर्ट में दावा है कि भारत में शेयर्ड वर्कस्पेस (साझा दफ्तर) बढ़ रहे हैं और 2026 तक यह 8 करोड़ वर्गफुट तक पहुंच जाएगा।

इन आंकड़ों को डीकोड करने से पहले छोटी-सी कहानी बताता हूं। 29 नवंबर को मैं शादी समारोह में एक कस्बाई शहर गया। मैंने एक खास ब्रांड की परफ्यूम लगाई थी, जो थोड़ी स्ट्रॉन्ग थी। वहां एक मेहमान से परिचय हुआ और उन्हें वह खुशबू पसंद आई, मासूमियत से उन्होंने ब्रांड का नाम पूछा और मैंने बता दिया।

चूंकि मैं कोट की जेब में 20 एमएल की बॉटल लेकर गया था, मैंने उनकी कलाई पर यह स्प्रे कर दी। दस मिनट बाद हाथ में खाने की प्लेट लेकर वह मेरे पास आए और बोले कि उन्होंने ये परफ्यूम ऑर्डर कर दी है और यह 24 से 48 घंटे में डिलीवर हो जाएगी। हमने थोड़ी देर बात की, मोबाइल नंबर साझा किया और निकल गए।

दो दिन बाद उन्होंने वाट्सएप पर अपना रोष जाहिर किया कि ये परफ्यूम उन्हें 8 दिसंबर के बाद डिलीवर होगी क्योंकि डिलीवरी वाली जगह के आसपास प्रोडक्ट का स्टॉक नहीं है। वह इतने लालायित थे कि उन्होंने मेट्रो शहर में रहने वाले किसी से संपर्क करके उसे लेने और भिजवाने के लिए कहा। जाहिर है उनके मित्र ने परफ्यूम खरीदी और चूंकि वह लिक्विड थी और बाय-एयर कुरिअर नहीं हो सकती थी, अंततः उसे सड़क मार्ग से भेजा गया। अब यह नई बोतल 10 दिसंबर को आने वाली है।

अगर आप इन सज्जन की हताशा का अंदाजा लगा पाएं तो टीयर-2, टीयर-3 शहरों में लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं को समझ सकते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो वे उसी समय किसी उत्पाद का आनंद उठाना चाहते हैं, जब वह बड़े शहरों में लॉन्च हुआ हो।

अब वापस उन आंकड़ों की ओर लौटते हैं, वह क्या दर्शाते हैं? किसी न किसी ने लोगों की आकांक्षाओं को भांप लिया। इसलिए अधिकांश जमीन के सौदे वेयरहाउस बनाने के लिए हुए हैं। कोई भी उत्पादक ग्राहकों से दूरी नहीं चाहता और 24 घंटे में प्रोडक्ट पहुंचाना चाहता है। इसके अलावा कोविड 19 की महामारी के बाद से घर खरीदारों की भूखंड की तरफ रुचि बढ़ी है।

भूखंड पर ‘बिल्ट-टु-सूइट’ फीचर (संभावित किराएदारों के लिए निर्माण) से ग्राहकों को अतिरिक्त सुविधा मिलती है। यह स्पष्ट रूप से उस आबादी की एक बड़ी संख्या को दर्शाता है, जो जहां हैं वहीं रहना चाहते हैं लेकिन जीवन में हर चीज का आनंद लेना चाहते हैं। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि बड़े शहर महंगे हैं और प्रदूषित बने हुए हैं।

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