Sunday, December 31, 2023

Happy new year 2024 January 1

 :2024 में दूसरों से आगे रहने की आदत बना ले

हैप्पी न्यू ईयर। हालांकि कई लोगों के लिए नया साल हमारे सेलिब्रेशन से 8.5 घंटे पहले ही शुरू हो गया था। उन्होंने नए साल का स्वागत 31 दिसंबर को ही भारतीय मानक समय (आईएसटी) के हिसाब से दोपहर के 3.30 बजे कर लिया था। चौंक गए ना? हां, 2024 का स्वागत करने वाला पहला देश था प्रशांत क्षेत्र का आयलैंड ऑफ टोंगा, समोआ और किरीबाती।

2024 का सबसे अंत में स्वागत करने वाला देश अमेरिका के पास हावलैंड और बेकर द्वीप समूह होंगे। उनके लिए साल 2023, 1 जनवरी को शाम 5.29 पर खत्म होगा और नया साल शाम 5.30 (आईएसटी) पर शुरू होगा। प्रशांत क्षेत्र से लेकर कोई भी देश हो, जब बात कसरत या अनुशासन की हो तो हमने लोगों को ये कहते हुए हमेशा सुना होगा कि ‘सोमवार से शुरू करेंगे’। जबकि कुछ कहेंगे कि एक तारीख से शुरू करूंगा।

हर साल उन्हें तथाकथित रूप से 12 पहली तारीखें मिलती हैं लेकिन वे सभी की सभी 12 मिस कर देते हैं और फिर पहली तारीख का लक्ष्य बनाने के लिए नए साल का इंतजार करते हैं। और बड़ी संख्या में लोग आसानी से कहते हैं, यहां तक कि वादा भी करते हैं कि ‘पक्का, मैं अगले साल से शुरू करूंगा’। पर आपको पता है कि उनके नए साल के वादों का क्या होता है?

जानना दिलचस्प होगा कि एक अन्य तरह के सुपर स्मार्ट लोग भी होते हैं, जो कसरत नहीं कर पाने की अपनी ग्लानि को अपने स्मार्ट शब्दों से छुपाते हैं और कहेंगे कि ‘2024 में मेरा गोल 2023 के लक्ष्य को पूरा करना है, हालांकि मुझे इसे 2022 में ही पूरा करना था, क्योंकि मैंने इसे 2021 में पूरा करने का वादा किया था और 2020 में इसकी योजना बनाई थी, जब महामारी ने हमारी आंखें खोली थीं और सेहत को देखते हुए मैंने अपनी हेल्थ का ख्याल रखने का लक्ष्य बनाया था।’

टालमटोली की मानसिकता वाले उन सबसे मैं कहना चाहता हूं कि 2024 में, महीने का पहला दिन, सोमवार, और न्यू ईयर का पहला दिन भी एक ही दिन है। मेरा मतलब है आज। ऐसे में कोई बहाना नहीं बना सकता खासकर जब कोविड हमें बाहर जाने से रोक रहा है, मंदी दरवाजे पर खड़ी है और रोजगार के अवसर भी कम दिख रहे हैं, यहां तक कि प्रतिभाशाली छात्रों के लिए भी। मैं मजाक नहीं कर रहा हूं। देश के प्रतिष्ठित कॉलेज से ग्रैजुएट होने वाले छात्रों का प्लेसमेंट पांच सालों से भी ज्यादा के निचले स्तर पर आ गया है।

यह बेहद योग्य उम्मीदवारों के लिए भी भर्ती की मांग में कमी का संकेत है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने बताया कि 2021 में 96%, 2022 में 95% की तुलना में इस साल 86% छात्रों को ही नौकरी के ऑफर मिले हैं। आर्थिक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए कई रिक्रूटर्स ने इस साल नौकरी के ऑफर टाले हैं। यही हाल स्टैनफोर्ड का है। अमेरिका-यूरोप में मेधावी छात्रों की मांग थमी है। अगर आपके पास नौकरी है तो खुद को लकी मानें और जब तक नौकरियों के बाजार पर छाई धुंध साफ नहीं हो जाती, कड़ा परिश्रम करते हुए नौकरी में बने रहें।

2024 में जिन चीजों पर आपको विचार करना चाहिए उनमें से एक है हर पहलू में दूसरों से आगे रहना। सोशल मीडिया पर वक्त बर्बाद ना करें। सोशल मीडिया के सारे प्लेटफॉर्म एआई का प्रयोग कर रहे हैं और आपको जो पसंद है, वही बार-बार दे रहे हैं। वे आपको कभी नई चीज नहीं दिखाएंगे जो इस उम्र में आपको जानना जरूरी है। मेरा यकीन करें, विविधता भरी सामग्री देने वाले माध्यमों में न्यूज़पेपर्स एक हैं।नए कौशल के लिए छोटे-छोटे कदम लें। मैंने कदम बढ़ाए हैं।

आज से मैं दैनिक भास्कर के मोबाइल एप पर जॉब्स व एजुकेशन सेक्शन में हर रोज तीन मिनट के वीडियो में दिखूंगा, जिसमें उन सबसे महत्वपूर्ण चीजों पर रोशनी डालूंगा जो युवाओं को करनी या जाननी चाहिए। दूसरों से आगे रहने के लिए शॉर्ट टर्म कोर्स व सर्टिफिकेट करें।

Thursday, December 28, 2023

Naukri k tarike

 इसी तरह, अगर आप नौकरी की तलाश में हैं तो आपको पता होना चाहिए कि सबसे पहले किस शहर जाना है। अध्ययनों के अनुसार, बेंगलुरु आज भी सभी उद्योगों में नियुक्ति के लिए शीर्ष स्थान पर है। जूनियर स्तर की लगभग 29.35% नौकरियां इस शहर में तेजी से बढ़ते टिकाऊ सामान, दूरसंचार, बुनियादी ढांचे और निर्माण, ऊर्जा, यूटिलिटी और खुदरा जैसे क्षेत्रों से आ रही हैं। मध्यम स्तर की नियुक्तियों में भी बेंगलुरु का योगदान सबसे अधिक 38.16% है, वहीं सीनियर स्तर की नियुक्तियों में इसका प्रतिशत 35.87 है।

हमें हमेशा ऐसे शहरों की तलाश करनी चाहिए, जहां सरकारी या निजी इनिशिएटिव्स उसके रूपांतरण में योगदान देते हों, जिससे वहां विभिन्न क्षेत्रों में नई नौकरियां पैदा होती हों। मुंबई के समीप ठाणे, गुजरात में वडोदरा, राजस्थान में जयपुर, दिल्ली में एनसीआर, तमिलनाडु में कोयंबटूर, यूपी में लखनऊ के साथ ही चंडीगढ़ और मोहाली जैसे शहरों का ही उदाहरण लें। ये सभी स्तरों के लिए प्रतिभाओं का केंद्र बन चुके हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इनमें से हरेक की कुछ न कुछ खासियत है।

मिसाल के तौर पर, ठाणे निर्माण और बुनियादी ढांचे के लिए जाना जाता है क्योंकि मुंबई में अचल संपत्ति की कीमतें बहुत अधिक हैं। यही कारण है कि अधिकांश लोग काम तो मुंबई में करते हैं लेकिन आवास ठाणे में खरीदते हैं। इसी तरह कोयंबटूर- जो ऑटोमोबाइल बाजार के लिए जाना जाता है- सेवानिवृत्त लोगों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करता है।

टियर-2 और टियर-3 बाजारों में उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता में लगातार वृद्धि को देखते हुए देश के इन दूरदराज के इलाकों में रोजगार-सृजन बढ़ रहा है, खासकर खुदरा क्षेत्र में बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए। अगर आप रिटेल में करियर तलाश रहे हैं तो किसी अन्य इंडस्ट्री में शिफ्ट होने से पहले अपने शहर या ऊपर बताए गए शहरों पर नजर डालें।

फंडा यह है कि “आगे क्या करना है’, यह जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि यह मालूम होना कि कड़ी मेहनत कैसे करें!

Thursday, December 7, 2023

मजबूत भरोसा हो तो आप कोई भी नई स्किल सीख सकते हैं

 

हिंदी पट्टी से कॉलेज आने वाले कई स्टूडेंट्स की तरह 28 वर्षीय यशोदा ने भी 12वीं की कक्षा हिंदी माध्यम से पास की थी। उत्तर प्रदेश स्थित उनके गांव कौशाम्बी का परिवेश पूरी तरह से हिंदी भाषी था। ऐसी जगहों से आने वाले छात्रों को कॉलेज में अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले विषयों को समझने में कठिनाई होती है। जबकि आज यशोदा कई ग्रामीणों को अंग्रेजी सिखा रही हैं।


उनके जैसे अधिकांश छात्रों की तरह, वह भी कभी विदेशी भाषा नहीं बोलती थीं। देश की किसी भी अन्य बहू की तरह वे बूढ़े सास-ससुर की देखभाल करती थीं, जबकि उनके पति राधे लोधी दिहाड़ी मजदूर थे। सीमित साधनों के बावजूद उनका जीवन चल रहा था कि एक दिन सबकुछ अस्त-व्यस्त हो गया।


राधे एक सड़क दुर्घटना के शिकार हुए और पैसे कमाकर परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं रह गए। यशोदा ने राधे की यह जिम्मेदारी अपने हाथों में लेने का फैसला किया। और सौभाग्य से उनका स्मार्टफोन इसमें काम आया। आप सोच रहे होंगे, कैसे? तो आगे पढ़ें।


उन्होंने कंटेंट निर्माण, वीडियो एडिटिंग व ऑनलाइन आकर्षण हासिल करने के तरीके सीखने में इंटरनेट पर घंटों बिताए। उन्होंने देसी खाना पकाने, कढ़ाई, सजावट की यूट्यूब चैनलों से शुरुआत की, पर बात नहीं बनी। पर वो हार मानने वालों में से नहीं थीं। उन्होंने देखा वे जहां रहती हैं, वहां के युवाओं और उनके जैसी महिलाओं में एक बड़ा अभाव है कि वे अच्छे-से अंग्रेजी नहीं बोल पाते हैं।


तब उन्होंने उन सभी के लिए ऑनलाइन अंग्रेजी शिक्षक बनने का फैसला किया। सबसे पहले उन्होंने अपने स्मार्टफोन के जरिए यूट्यूब पर दूसरों को अंग्रेजी बोलते सुनना शुरू किया। फिर खुद किताबें पढ़ने लगीं। आज वे जेम्स क्लीयर की ‘एटॉमिक हैबिट्स’ जैसी किताबें पढ़ती हैं, जिसे अधिकांश कॉन्वेंट शिक्षित लोग भी शायद अनदेखा कर देते होंगे। लेकिन यहां एक छोटा-सा ट्विस्ट है।


वे किताबें पढ़ने के लिए सुबह 3 बजे उठ जाती हैं। जब घर के बाकी लोग उठते हैं, तो वे रसोई आदि की जिम्मेदारी सम्भाल लेती हैं, लेकिन ईयरफोन लगाकर। चूंकि उनके आसपास रहने वालों में से कोई भी अंग्रेजी नहीं बोलता या समझता था, इसलिए उनके लिए धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाला माहौल पाना कठिन था।


इसलिए वे पूरे दिन ईयरफोन लगाए रहती थीं। दूसरों की बातें ध्यान से सुनना ही उनकी सफलता की कुंजी रही है। फिर वे खुद यूट्यूब पर वीडियो बनाने और उन्हें एडिट करने लगीं। उन्होंने उन वीडियो को यह कहते हुए जारी किया कि उनका कंटेंट ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों और ऐसे अन्य लोगों के लिए है, जो उनके जैसा जीवन बिताते हैं। उन्होंने फीडबैक मांगा और धीरे-धीरे अपने काम में सुधार लाती चली गईं। आज हिंदी पट्टी में उनके सब्स्क्राइबर्स की संख्या 3 लाख से अधिक है! और यशोदा अपने चैनल से हर महीने लगभग 15 से 20 हजार रुपए कमा लेती हैं।


आप इसे पसंद करें या न करें, लेकिन हम एक वैश्वीकृत दुनिया में रहते हैं और साझा लैंग्वेज होने के कारण अंग्रेजी ही आर्थिक तरक्की के अधिकतम अवसर मुहैया कराती है। इसके अलावा, देश के ग्रामीण बाजार में अंग्रेजी सीखने की बड़ी गहरी आकांक्षा है।


जब उसी पृष्ठभूमि के यशोदा जैसे लोग इस दिशा में आगे बढ़कर लोगों को अंग्रेजी सिखाने का बीड़ा उठाते हैं तो वहां के अन्य लोग भी तुरंत इसमें जुड़ जाते हैं। जैसा कि यशोदा कहती हैं, हम सभी कोई न कोई काम बेहतर तरीके से करने में सक्षम हैं और उसे बार-बार करने से ही आत्मविश्वास आता है। इस यूट्यूब स्टार की युवाओं को सलाह है- असफलताओं से कभी हार न मानें, बल्कि उनसे सीखें और बार-बार कोशिश करते रहें।


फंडा यह है कि भगवान कृष्ण ने एक बार कहा था- जहां विश्वास है वहां मैं हूं। यशोदा ने भी खुद पर विश्वास किया, राधे ने नैतिक समर्थन उन्हें दिया और देखा कि यशोदा कहां पहुंच गई हैं। अगर आप अपने पर भरोसा करते हैं तो किसी एक चीज में महारत हासिल कर लेंगे और आपके जीवन का हर पहलू उसी के अनुरूप होता चला जाएगा।



Yah content keval information aur motivation share krne k liye kiya gya h

Tuesday, December 5, 2023

 आंकड़ों के पीछे छुपे शब्दों को पढ़ना सीखें

एक दिन पहले
. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

जनवरी 2022 से लेकर अक्टूबर 2023 के बी3,924 एकड़ जमीन में से 44.5% का अधिग्रहण टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में हुआ। इस 44.5 फीसदी में 75% से ज्यादा जमीन नागपुर, पालघर, खालापुर, पानीपत, लुधियाना और पंचकुला की थी। इसमें से 1,461 एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त तो सिर्फ 17 सौदों में हो गई।

रीयल एस्टेट में काम करने वाले अग्रणी संस्था और इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट सर्विस देने वाली जोन्स लैंग लास्ले (जेएलएल) ने यह सर्वेक्षण किया, इसका कहना है कि यह साफ तौर पर दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और वृद्धि सिर्फ मेट्रो शहरों में नहीं टीयर-2 और टीयर-3 शहरों व कस्बों में भी दिखाई दे रही है।

जेएलएल के अनुसार बेंगलुरु और गुरुग्राम ऑफिस स्पेस खरीदने में आगे हैं। दिलचस्प है कि लोग ऑफिस स्पेस नहीं खरीद रहे। खरीदारों को स्पष्टता है कि नई जगह पर उन्हें कितनी सीटों की आवश्यकता है। कॉलियर्स फिक्की की रिपोर्ट में दावा है कि भारत में शेयर्ड वर्कस्पेस (साझा दफ्तर) बढ़ रहे हैं और 2026 तक यह 8 करोड़ वर्गफुट तक पहुंच जाएगा।

इन आंकड़ों को डीकोड करने से पहले छोटी-सी कहानी बताता हूं। 29 नवंबर को मैं शादी समारोह में एक कस्बाई शहर गया। मैंने एक खास ब्रांड की परफ्यूम लगाई थी, जो थोड़ी स्ट्रॉन्ग थी। वहां एक मेहमान से परिचय हुआ और उन्हें वह खुशबू पसंद आई, मासूमियत से उन्होंने ब्रांड का नाम पूछा और मैंने बता दिया।

चूंकि मैं कोट की जेब में 20 एमएल की बॉटल लेकर गया था, मैंने उनकी कलाई पर यह स्प्रे कर दी। दस मिनट बाद हाथ में खाने की प्लेट लेकर वह मेरे पास आए और बोले कि उन्होंने ये परफ्यूम ऑर्डर कर दी है और यह 24 से 48 घंटे में डिलीवर हो जाएगी। हमने थोड़ी देर बात की, मोबाइल नंबर साझा किया और निकल गए।

दो दिन बाद उन्होंने वाट्सएप पर अपना रोष जाहिर किया कि ये परफ्यूम उन्हें 8 दिसंबर के बाद डिलीवर होगी क्योंकि डिलीवरी वाली जगह के आसपास प्रोडक्ट का स्टॉक नहीं है। वह इतने लालायित थे कि उन्होंने मेट्रो शहर में रहने वाले किसी से संपर्क करके उसे लेने और भिजवाने के लिए कहा। जाहिर है उनके मित्र ने परफ्यूम खरीदी और चूंकि वह लिक्विड थी और बाय-एयर कुरिअर नहीं हो सकती थी, अंततः उसे सड़क मार्ग से भेजा गया। अब यह नई बोतल 10 दिसंबर को आने वाली है।

अगर आप इन सज्जन की हताशा का अंदाजा लगा पाएं तो टीयर-2, टीयर-3 शहरों में लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं को समझ सकते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो वे उसी समय किसी उत्पाद का आनंद उठाना चाहते हैं, जब वह बड़े शहरों में लॉन्च हुआ हो।

अब वापस उन आंकड़ों की ओर लौटते हैं, वह क्या दर्शाते हैं? किसी न किसी ने लोगों की आकांक्षाओं को भांप लिया। इसलिए अधिकांश जमीन के सौदे वेयरहाउस बनाने के लिए हुए हैं। कोई भी उत्पादक ग्राहकों से दूरी नहीं चाहता और 24 घंटे में प्रोडक्ट पहुंचाना चाहता है। इसके अलावा कोविड 19 की महामारी के बाद से घर खरीदारों की भूखंड की तरफ रुचि बढ़ी है।

भूखंड पर ‘बिल्ट-टु-सूइट’ फीचर (संभावित किराएदारों के लिए निर्माण) से ग्राहकों को अतिरिक्त सुविधा मिलती है। यह स्पष्ट रूप से उस आबादी की एक बड़ी संख्या को दर्शाता है, जो जहां हैं वहीं रहना चाहते हैं लेकिन जीवन में हर चीज का आनंद लेना चाहते हैं। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि बड़े शहर महंगे हैं और प्रदूषित बने हुए हैं।