Monday, May 5, 2025

Paper plate and paper cup ka business kaise kre

 यहाँ पेपर प्लेट और पेपर कप बनाने के बिज़नेस को शुरू करने के लिए एक विस्तृत योजना दी गई है, जो केवल एक प्लॉट ऑफ़ लैंड से शुरू होती है। योजना में निवेश, आवश्यक मशीनें, लाइसेंस और स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया शामिल है।


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### **1. बिज़नेस का अवलोकन**


* **प्रोडक्ट**: पेपर प्लेट, पेपर कप (डिस्पोजेबल आइटम)

* **बाजार**: होटल्स, स्ट्रीट फूड वेंडर्स, इवेंट्स, शादी समारोह

* **लाभ**: बढ़ती मांग, इको-फ्रेंडली विकल्प, कम लागत में उत्पादन


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### **2. आवश्यक भूमि और ढांचा**


* **प्लॉट का आकार**: कम से कम 1000–1500 वर्ग फीट

* **ढांचा**:


  * मशीन इंस्टॉलेशन के लिए शेड

  * स्टोरेज एरिया

  * ऑफिस स्पेस (छोटा)


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### **3. निवेश (लगभग लागत)**


| खर्च का विवरण | अनुमानित राशि (INR) |

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| शेड निर्माण | ₹1,00,000 – ₹2,00,000 |

| मशीनरी (ऑटोमैटिक/सेमी) | ₹1,50,000 – ₹4,00,000 |

| कच्चा माल (पेपर रोल) | ₹50,000 – ₹1,00,000 |

| बिजली/जनरेटर सेटअप | ₹50,000 |

| श्रमिकों की सैलरी (3 महीने) | ₹1,00,000 |

| लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन | ₹10,000 – ₹15,000 |

| **कुल निवेश** | **₹4,50,000 – ₹8,00,000** |


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### **4. आवश्यक मशीनरी**


* पेपर प्लेट मेकिंग मशीन

* पेपर कप मेकिंग मशीन

* कटिंग मशीन

* हीटर और मोल्ड्स


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### **5. स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया**


1. **मार्केट रिसर्च** – डिमांड, कॉम्पिटीटर, रॉ मटेरियल सप्लायर्स की जानकारी

2. **बिज़नेस रजिस्ट्रेशन** – Udyam, GST, ट्रेड लाइसेंस

3. **इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण** – शेड, बिजली, पानी की व्यवस्था

4. **मशीन खरीद और इंस्टॉलेशन** – भरोसेमंद विक्रेता से

5. **रॉ मटेरियल खरीद** – पेपर रोल, कोटेड शीट्स

6. **वर्कर्स की नियुक्ति** – 2-3 लोग शुरुआती तौर पर

7. **प्रोडक्शन शुरू करें**

8. **बाजार में सप्लाई** – थोक विक्रेताओं, इवेंट मैनेजर्स, दुकानदारों से संपर्क


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### **6. लाभ और रिटर्न**


* प्रति दिन 1000–2000 प्लेट/कप बन सकते हैं

* प्रति प्लेट 20–30 पैसे का खर्च, बिक्री मूल्य 50 पैसे – ₹1

* महीने का मुनाफा ₹30,000 – ₹70,000 तक संभव


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### **7. सुझाव**


* शुरुआती तौर पर सेमी-ऑटोमैटिक मशीन से शुरू करें

* सोशल मीडिया और लोकल मार्केट में प्रचार करें

* गुणवत्ता पर ध्यान दें


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क्या आप इसमें केवल पेपर प्लेट से शुरू करना चाहते हैं या दोनों (प्लेट और कप)?

बहुत अच्छा सवाल है! एक बिज़नेस शुरू करने से पहले आपको खुद से या एक्सपर्ट से कुछ अहम सवाल पूछने चाहिए, जो आपके प्लान को मजबूत और व्यवहारिक बनाएंगे। नीचे कुछ ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं जो आपको पेपर प्लेट/कप बिज़नेस में सोचने और योजना बनाने में मदद करेंगे:


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### **1. बिज़नेस मॉडल से जुड़े सवाल**


* क्या मैं **मैन्युफैक्चरिंग** करूंगा या केवल **पैकिंग और सेलिंग**?

* मैं **B2B (बिज़नेस टू बिज़नेस)** करना चाहता हूँ या **B2C (ग्राहकों को सीधा बेचूँ)**?

* क्या मेरा बिज़नेस **सीज़नल** रहेगा (शादी, त्योहार आदि में अधिक बिक्री)?


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### **2. उत्पाद और गुणवत्ता से जुड़े सवाल**


* कौन से **साइज और प्रकार** की प्लेट/कप की सबसे ज़्यादा मांग है?

* मुझे **कोन से रॉ मटेरियल (पेपर)** का इस्तेमाल करना चाहिए (बायोडिग्रेडेबल, फूड-ग्रेड आदि)?

* क्या मेरा प्रोडक्ट **ISI या फूड सेफ्टी सर्टिफिकेशन** ले सकता है?


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### **3. बाजार और बिक्री से जुड़े सवाल**


* मेरा **टारगेट मार्केट** कौन है (होटल्स, दुकानदार, कैटरर)?

* क्या मेरे पास कोई **स्थायी ग्राहक नेटवर्क** या **डिस्ट्रीब्यूटर** है?

* कैसे मैं **लोकल और ऑनलाइन मार्केटिंग** करूँगा?


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### **4. संचालन और कर्मचारी से जुड़े सवाल**


* मुझे कितने **वर्कर्स** चाहिए और उनकी ट्रेनिंग कैसे कराऊँ?

* क्या मुझे **शिफ्ट में काम** करवाना होगा?

* अगर मशीन खराब हो जाए तो **मरम्मत और मेंटेनेंस** कैसे होगा?


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### **5. फाइनेंस और ग्रोथ से जुड़े सवाल**


* मेरा **ब्रेक ईवन पॉइंट (Break-even Point)** कब आएगा?

* क्या मैं इस बिज़नेस के लिए **सरकारी सब्सिडी/लोन (PMEGP, Mudra)** ले सकता हूँ?

* क्या भविष्य में मैं **प्रोडक्ट लाइन बढ़ा सकता हूँ**? (जैसे कि पेपर बाउल, ट्रे आदि)


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### **6. कानूनी और पर्यावरणीय सवाल**


* क्या मुझे **प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से NOC** चाहिए?

* क्या मेरा यूनिट **इको-फ्रेंडली** और रीसायक्लेबल मानकों पर खरा उतरता है?


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अगर आप चाहें तो मैं इन सवालों पर आधारित एक **बिज़नेस प्लान टेम्पलेट** भी बना सकता हूँ, जो आपको निवेशकों को दिखाने या खुद के लिए

 दिशा तय करने में मदद करेगा। क्या आप ऐसा चाहते हैं?बिलकुल, यहां और भी गहरे और व्यावसायिक दृष्टिकोण से पूछे जाने योग्य प्रश्न हैं जो एक मजबूत और सफल पेपर प्लेट/कप बिज़नेस के लिए जरूरी होते हैं। इन्हें 6 प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:


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### **1. रणनीतिक (Strategic) प्रश्न**


* क्या यह बिज़नेस 5 साल बाद भी उतना ही लाभदायक रहेगा?

* क्या मेरा बिज़नेस भविष्य में **बायोडिग्रेडेबल/ग्रीन सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स** पर आधारित हो सकता है?

* अगर बड़ी कंपनियां (जैसे Chuk, Ecoware) मेरे एरिया में आ गईं तो मैं कैसे टिकूंगा?


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### **2. ग्राहक और ब्रांडिंग से जुड़े सवाल**


* मेरा ब्रांड नाम क्या होगा और उसका लोगो कैसे दिखेगा?

* क्या मैं अपने प्रोडक्ट को **प्राइवेट लेबलिंग** के लिए दे सकता हूँ?

* क्या मैं फीडबैक सिस्टम रखूंगा जिससे ग्राहक की राय मिले?


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### **3. वितरण और लॉजिस्टिक्स के सवाल**


* माल की **डिलीवरी** कैसे होगी – अपनी गाड़ी या थर्ड पार्टी?

* मुझे **पैकिंग यूनिट** और **स्टोरेज शेल्फ लाइफ** का ध्यान कैसे रखना होगा?

* क्या मैं **राज्य या देश के बाहर** भी माल भेज सकता हूँ?


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### **4. तकनीक और ऑटोमेशन**


* कौन सी मशीन ज्यादा मुनाफा देगी – **हाइड्रॉलिक, न्यूमैटिक या ऑटोमैटिक**?

* क्या मशीन को **मोबाइल से मॉनिटर** किया जा सकता है?

* क्या मैं ERP या अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (जैसे Tally या Zoho) का इस्तेमाल करूंगा?


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### **5. रिस्क मैनेजमेंट सवाल**


* अगर **रॉ मटेरियल की कीमत** बढ़ जाए तो क्या बैकअप प्लान है?

* क्या मैंने **इंश्योरेंस कराया है** मशीन, स्टॉक और स्टाफ के लिए?

* क्या मैं किसी **लीगल डिस्प्यूट** की स्थिति के लिए तैयार हूँ?


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### **6. सीखने और सुधार के सवाल**


* मैं खुद को इस बिज़नेस में अपग्रेड कैसे करूंगा? (ट्रेनिंग, कोर्स, सेमिनार)

* क्या मैं **कस्टमर का डाटा एनालिसिस** करता हूँ ताकि प्रोडक्ट बेहतर हो सके?

* क्या मैं हर महीने **बिज़नेस रिपोर्ट** बनाऊंगा और उसकी समीक्षा करूंगा?


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यदि आप चाहें तो मैं इन सभी सवालों पर आधारित एक **व्यक्तिगत SWOT Analysis** (Strengths, Weaknesses, Opportunities, Thr

eats) तैयार कर सकता हूँ। क्या आप इसे बनवाना चाहेंगे?

Friday, January 10, 2025

CTET pass

 *CTET पास करने के लिए आवश्यक अंक - विस्तृत मार्गदर्शिका* 


 *न्यूनतम पास अंक:* 

• *सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार: 90 अंक (60%)* 

• *OBC/SC/ST श्रेणी के उम्मीदवार: 82 अंक (55%)* 


 केंद्रीय संस्थानों में भर्ती के लिए आवश्यक अंक: सभी में समान मानदंड: सामान्य - 90 अंक, OBC/SC/ST - 82 अंक 


महत्वपूर्ण बिंदु:

• कुछ राज्यों में other State के सभी वर्गों के लिए 90 अंक अनिवार्य हैं 


• राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, हरियाणा में CTET मान्य नहीं है 


 CTET के फायदे :

• राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता

• केंद्रीय विद्यालयों में नौकरी का अवसर

• कई राज्यों में मान्यता

• बेहतर करियर विकल्प


CTET का प्रमाण पत्र आजीवन वैध होता है


CTET पास करने के बाद क्या करें

बहुत सारे लोगों के मन में ये सवाल होगा कि आखिर अब क्या करें बाकी कई लोगों को वैसे ही रास्ता पता है

 आप CTET के आधार इन विभागों में जॉब पा सकते हैं 

1. केंद्रीय विद्यालय संगठन

2. नवोदय विद्यालय

3. DSSSB

4. EMRS

5. AEES

6. 

6.  उत्तर प्रदेश में सुपर टेट और जूनियर एडेड.. बिहार में भी, इसके अलावा भी कई सारे डिपार्टमेंट्स हैं जहां CTET मांगा जाता है


अब आपको तैयारी शुरू करनी है अगर आप इन विभागों के एग्जाम देना चाहते हैं तो.. सबसे पहले बात करते हैं


 KVS (केंद्रीय विद्यालय संगठन) और NVS (नवोदय विद्यालय समिति) की


केंद्रीय विद्यालय कक्षा 1 से शुरू होते हैं.. वर्तमान में देश में लगभग 1252 केंद्रीय विद्यालय है...इन सभी विद्यालयों में आप.. PRT, TGT और PGT बन सकते हो.. PGT की पोस्ट के लिए CTET अनिवार्य नहीं है...बाकी PRT और TGT के लिए CTET अनिवार्य है


नवोदय विद्यालय कक्षा 6 से शुरू होते हैं... यहाँ PRT की पोस्ट नहीं होती है... नवोदय में आप सिर्फ TGT और PGT बन सकते हैं.. यहाँ भी PGT के लिए CTET की आवश्यकता नहीं है लेकिन TGT के लिए CTET अनिवार्य है


 बात करें DSSSB की तो यहाँ भी PRT, TGT और PGT की पोस्ट के लिए अप्लाई कर सकते हैं... PRT और TGT के लिए CTET चाहिए लेकिन PGT के लिए आवश्यकता नहीं है


 EMRS विद्यालय नवोदय विद्यालय जैसे होते हैं...ये भी कक्षा 6 से शुरू होते हैं और आवासीय होते हैं.. ये जनजातीय मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं

  

 जॉब लोकेशन KVS और NVS में आपको देश में कहीं भी भेजा जा सकता है... जबकि DSSSB में सिर्फ DELHI में ही जॉब करनी होती है


CTET में सिर्फ Qualify मार्क्स लाना ही पर्याप्त है.. KVS NVS, DSSSB, EMRS, AEES यहाँ CTET के अंक मायने नहीं रखते हैं.. सिर्फ़ क्वालिफाई मार्क्स ले आइए


इसलिए इस बात की फिक्र ना करें कि मेरे सिर्फ 90 अंक ही आए हैं.. आप क्वालिफाई हो चुके हैं बेफिक्र रहें


तो...उपर्युक्त विवरण से जो भी नये विद्यार्थी हैं जिन्हें जानकारी नहीं है कि आगे क्या किया जाए.. उनके मार्गदर्शन के लिए ही ये सब जानकारियां शेयर की जा रही है


 तैयारी शुरू कर दीजिए.. शिक्षक बनने की

Thursday, August 1, 2024

गेम्स और वीडियो से सीखने वाली जैन ज़ी को हल्के में न लें

 

एन. रघुरामन का कॉलम:गेम्स और वीडियो से सीखने वाली जैन ज़ी को हल्के में न लें

2 दिन पहले

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चलने वाली राजधानी इस सोमवार को मुंबई से तय समय से चार मिनट की देरी से छूटी, लेकिन इसने तुरंत गति पकड़ते हुए ज्यादातर जगहों पर इसे बरकरार रखा। मेरे सहयात्री ने नजरें उठाकर देखा भी नहीं।


वे लोग इंजन-बोगी पर बात करने में व्यस्त थे। एक कह रहा था, “ये सबसे लंबा इंजन है।’ दूसरे ने कहा, “नहीं। वैग 12 ही सबसे लंबा इंजन है।’ अगले एक घंटे में मैंने कई नए शब्द सुने जैसे डब्ल्यूडीजी-थ्रीए, वैप-7, वैप-4 (अलग-अलग इंजन), इसमें वंदे भारत के इंजन-कोच के नाम भी थे जैसे उत्कृष्ट, आईसीएफ रेड, क्लासिक-एस (शताब्दी का इंजन), क्लासिक-आर (राजधानी कोच)। वे बात कर रहे थे कि किस वैगन में पशुओं को लाया ले जाता है।


उनकी बातें सुनकर मैं हक्का-बक्का था। वो इसलिए क्योंकि फर्स्ट एसी की उन दोनों सीटों पर बैठे वो लोग किसी को देख तक नहीं रहे थे। वे दोनों थे 12 वर्षीय अहान सक्सेना व दस वर्षीय उसका भाई विहान, जो कतर के बिड़ला पब्लिक स्कूल में कक्षा सातवीं व छठवीं के स्टूडेंट हैं। वे अपनी मां गरिमा के साथ यात्रा कर रहे थे।


कतर में पले-बढ़े होने के बावजूद, दोनों भाई भारतीय रेलवे की हरेक चीज जानते थे क्योंकि उन्होंने पूरे रेलवे की गाड़ियां चलाई हैं! आप ताज्जुब कर रहे होंगे कैसे? वे इंडियन रेलवे सिमुलेटर नाम का फ्री वीडियो गेम खेलते हैं, इसे टीम हाइकर्स ने डेवलप किया है, जहां ये भारतीय रेलवे सिस्टम की नकल करता है।


इससे ट्रेन चला सकते हैं। हर केबिन में वास्तविक जानकारी होती है और जब ट्रेन चलाते हैं तो थरथराने वाली ट्रैक की आवाज भी आती है। पहली नजर में देखने पर यह अच्छा गेम लगता है। हालांकि गेम खेलने वालों का अनुभव कुछ और कहानी कहता है।


बाकी खेलों की तरह इसमें कोई मिशन नहीं है, जहां विरोधी को मार गिराना होता है। इस तरह यह आपके गेमप्ले को केवल ट्रेन चलाने तक सीमित कर देता है। लेकिन भारत की भूगोल के बारे में एक गहन जानकारी देता है।


वे यही नहीं रुके। वे ज्यादातर स्टेशनों के नाम जानते थे और जैसे ही ट्रेन मुंबई पार करके माथेरान पहुंचने को थी, बड़ा भाई अहान बताने लगा कि कैसे ये हिल स्टेशन दिसंबर 2001 में हुए भीषण हत्याकांड के लिए भी जाना जाता है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, इसमें पति ने पत्नी की हत्या करके उसका सिर कटा शरीर होटल के बाथरूम में छोड़ दिया था।


ना सिर्फ माथेरान के अपराध बल्कि वे बच्चे अमेरिका से लेकर भारत तक में हुई ज्यादातर आपराधिक वारदातों के बारे में जानते थे, क्योंकि वे रे विलियम जॉनसन के बनाए कार्यक्रम देखते हैं, जो सोशल मीडिया पर क्राइम शोज़ लेकर आए।


दिलचस्प रूप से जब मैंने उनसे हवाई यात्राओं का पूछा, तो उन्हें हर तरह के एयरक्राफ्ट, इंजन पावर, साइज, यात्री क्षमता, उसके निर्माणकर्ता का नाम भी मालूम था। उनकी मां मुझे बता रही थीं कि किसी भी यात्रा पर जाने से पहले, बच्चे गूगल करते हैं, साइट सीइंग करते हैं और वर्चुअल स्पेस में उपलब्ध ज्ञान का हर टुकड़ा सहेजते हैं।


फिर वे वास्तविक जीवन में अपने अनुभव से उसे जोड़ते हैं। सच कहूं तो वे भी मोबाइल किड्स थे, लेकिन केवल तब, जब वे ऐसी जानकारी खोजना चाहते थे जो उन्हें रुचि के चुने हुए क्षेत्र में बुद्धिमान बना सके। गर्व से भरी उनकी मां ने कहा कि इंटरनेट पर कुछ भी करने से मैं उन्हें नहीं रोकती, हां, बस इसका ध्यान रखती हूं कि सब कुछ मेरी आंखों के सामने हो।


फंडा यह है कि अगर जेन ज़ी किताबें नहीं छू रही है, तो पढ़ने के लिए उन पर दबाव न बनाएं, बस उनकी उत्सुकता बनाए रखने के तरीके ईजाद करें और हर चीज जानने की भूख पैदा करें। क्या फर्क पड़ता है, अगर वे मोबाइल गेम्स या सोशल साइट से सीख रहे हैं, आखिरकार यह ज्ञान ही तो है।

Thursday, June 27, 2024

एन. रघुरामन का कॉलम:अगर आप एक बेहतरीन एमबीए हैं तो कभी जॉबलेस नहीं रहेंगे!


कल्पना करें कि आप एक पिज्जा कंपनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू दे रहे हैं। एचआर आपसे पूछते हैं कि ‘इस बात की बढ़ती जागरूकता के साथ कि प्रत्येक पिज्जा में 3,500 से ज्यादा कैलोरी होती हैं, जो कि प्रति भोजन 600 कैलोरी की सामान्य संख्या से कहीं ज्यादा है, आपको क्या लगता है हम अपनी बिक्री कैसे बढ़ा सकते हैं?’ और आप तुरंत कहते हैं, ‘क्या मैं आपको एक लंबा जवाब दे सकता हूं?’ और जब एचआर सिर हिलाता है, तो आप कहना शुरू करते हैं, ‘विस्तार ही एकमात्र रास्ता है।वर्तमान में खाद्य सेवाओं की इंडस्ट्री करीब 41 ट्रिलियन रु. की है। इसमें से 1.2 ट्रिलियन संगठित हैं। उसमें पिज्जा उद्योग केवल 8,300 करोड़ का है और पिज्जा बाजार में सभी 15 प्रमुख प्लेयर्स में से प्रत्येक के पास कम से कम 100 आउटलेट्स हैं। इसमें डोमिनोज़ का हिस्सा सबसे ज्यादा है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि इसकी योजना 4000 आउटलेट्स के साथ दादरी, सुल्तानपुर और यहां तक कि बदायूं जैसे छोटे शहरों में भी पहुंचने की है, जहां लोग रिश्तेदारों के साथ कुछ खाने और जश्न मनाने के लिए आते हैं। वे उन लोगों को, विशेषकर ग्रामीणों को 99 रुपए में एक सादा पिज्जा देते हैं, जो जानना चाहते हैं कि यह डिश आखिर क्या है।

फिर वे धीरे-धीरे उन्हें नॉलेज और ऑफरिंग्स के साथ अपग्रेड करते चलते हैं और अंत में 999 रुपए का पिज्जा बेचने में भी कामयाब हो जाते हैं। डिलीवरी से उनकी 68% कमाई होती है और डाइन-इन और टेकअवे से 32%। डोमिनोज़ बेंगलुरू से शुरू हुए 20 मिनट में डिलीवरी वाले कॉन्सेप्ट पर काम कर रहा है, जहां एक बड़ी युवा आबादी है जो हर अवसर पर पिज्जा खाती है।

क्षमा करें सर, मेरा जवाब थोड़ा लंबा हो गया। लेकिन मैं इस बढ़ते हुए उद्योग का हिस्सा बनने के लिए बहुत उत्सुक हूं।’ मेरा विश्वास करें यदि आपने इस तरह उत्तर दिया है, तो एचआर का अगला सवाल होगा, ‘आप कब से जॉइन कर सकते हैं? वैसे, एमबीए में आपके प्रोफेसर कौन थे?’

मैंने भी ठीक यही कहा था, जब किसी ने मुझसे पूछा कि क्या 2024 में एमबीए करना उचित है? उद्योग के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों ने एमबीए को मृत घोषित कर दिया है, जिनमें मैं भी शामिल हूं। मैंने हाल ही में डिजिटल भास्कर पर कहा कि इस साल एमबीए वालों को नौकरी के अवसर कम मिले हैं। लेकिन मेरा सवाल यह था कि क्या आप जिस श्रेणी में आवेदन कर रहे हैं, उसमें सर्वश्रेष्ठ हैं? मैं 50 वर्षीय डॉ. एलेक्जेंड्रा फ्रीमैन का उदाहरण देना चाहता हूं, जो यूके में हाउस ऑफ लॉर्ड्स की नवीनतम सदस्य हैं।

वर्ष 2000 से इस कार्यक्रम को ‘पीपुल्स पीयर्स’ कहा जाता है, जो सर्वश्रेष्ठ मेधावियों का चयन करते हैं। डॉ. फ्रीमैन को लगा कि वे इस पद के लिए उपयुक्त हैं और उन्होंने आवेदन कर दिया। एक साल तक कोई जवाब नहीं आया और उन्हें लगा कि उनका आवेदन कूड़ेदान में चला गया है।

इस कार्यक्रम के लिए साल में केवल दो लोगों की नियुक्ति होती है और पूरे देश से मिलने वाले 5,600 आवेदनों के साथ यहां कर्मचारी बनने वाले आवेदकों की सफलता दर केवल 1.3% है। लेकिन आज डॉ. फ्रीमैन का काम वैज्ञानिक डेटा और चिकित्सा संबंधी जोखिमों को सरल प्रारूप में सर्वोच्च अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करना है।

कोई भी विश्वविद्यालय पढ़ने की आदत की भरपाई नहीं कर सकता। यदि आप एमबीए हैं, तो स्टडी करते समय भी पढ़ें और काम करते समय भी, ताकि अपने आपको आंकड़ों और ताजा-तरीन घटनाओं के साथ दैनिक आधार पर अपग्रेड कर सकें।

फंडा यह है कि यदि आप अपने पेशे में बेजोड़ और अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ हैं, तो हाउस ऑफ लॉर्ड्स भी आपको काम पर रखेगा, जबकि पिज्जा आउटलेट आपका इंतजार करता रहेगा!

Apne patni k swabhav ko Jane

 पीयूष ने कहा, "अंकल, आज शाम 6.30 बजे का शो है, मैंने ऑनलाइन टिकट बुक कर लिए हैं। शाम 5.30 बजे ऑफिस से निकलकर उसे लेने जाऊंगा और सीधे थिएटर चला जाऊंगा।' उनकी बात सुनकर डॉ. सुरेश ने कहा, "अब मैं जो कहूंगा, वही करोगे?' पीयूष मना नहीं कर सकते थे, क्योंकि डॉ. सुरेश उनके पिता के सबसे अच्छे दोस्त थे। इसलिए उन्होंने बस सिर हिला दिया।


डॉ. सुरेश ने आगे कहा, "शाम 5.30 बजे अपना मोबाइल फोन बंद कर दो और शाम 6.30 बजे तक बंद रहने दो। शाम 6.30 बजे अपना मोबाइल चालू करो और चारु को फोन करो। उससे कहो कि कुछ जरूरी कारणों से तुम्हें फिल्म देखने जाना रद्द करना पड़ा और माफी मांगो।


रात 8 बजे से पहले घर नहीं जाना। घर पर तुम्हारा जिस तरह से अभिवादन किया जाएगा, वह उसके स्वभाव को परखने का थर्मामीटर होगा। टिकट की कीमत की चिंता मत करो, वो मैं दे दूंगा। लेकिन कल तक उसे इस आइडिया के बारे में मत बताना।'

Friday, May 3, 2024

There is nothing for free

 ज्यादा से ज्यादा हुनर सीखें, अपने सीखने में मूल्यों को शामिल करें, दुनिया को बेहतर तरीके से जानें, वैकल्पिक नई नौकरी की भूमिकाएं जानें, जिनमें आप फिट हो सकते हैं और संक्षेप में अपने और अपने कौशल की बेहतर कीमत पाने के लिए खुद को और कीमती बनाएं। इससे आप इतने संपन्न हो जाएंगे कि कल को मुफ्त की चीजें बंद भी हो जाएं तो कनेक्टिविटी जैसी चीजें पैसे देकर भी ले सकेंगे। फिजूल के वीडियोज या इंस्टा पर रील्स स्क्रॉल करने में डाटा और कीमती वक्त न गंवाएं।

फंडा यह है कि जीवनभर कुछ भी फ्री या सब्सिडी पर नहीं मिलता रहेगा। आकस्मिक योजना रखें कि यदि मुफ्त की चीजें अचानक बंद हो जाएं तो उन जरूरतों की पूर्ति कैसे करेंगे।

Bachpan ko kaise jiye

 


क्या आप चाहते हैं कि बच्चा बिस्तर से उछलकर उठे और स्कूल जाए? जवाब आसान है। उन्हें जड़ों से जोड़ें। न्यूयॉर्क शहर से 17 किमी दूर, मोंटक्लेयर नामक जगह यही कर रही है। उन्होंने बच्चों की छोटी साइकिलों को ‘बाइक बस’ नाम दिया है, जो पीले रंग के कारण बस जैसी दिखती हैं।Ads by

बच्चे बीच शहर की एक तय जगह से 3.5 किमी दूर स्कूल जाते हैं। चूंकि बच्चे अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, इसलिए वे पहले एक जगह इकट्ठा होते हैं। फिर यहां से वे ‘बाइक बस’ से 20 मिनट के सफर पर निकलते हैं।

शुरुआत में वे हफ्ते में एक दिन ऐसा करते है। इस पहल के ज़रिए माता-पिता को लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में स्थायी बदलाव की राह खुलेगी और शहर में बेहतर क्रॉसवाक, बाइक के लिए अलग लेन बन पाएंगी और ऐसा समय या दिन तय किए जा सकेंगे जब मोटर गाड़ियां न चलें।

बाइक बस का आइडिया बार्सिलोना, स्पेन में भी है। साल 1960 में कम से कम 50% अमेरिकी छात्र साइकिल से स्कूल जाते थे। ये आंकड़ा 2009 में गिरकर 13% हो गया और 2024 में इसके एक अंक में पहुंचने का अंदेशा है।

गिरावट के पीछे माता-पिता का डर है कि मौजूदा ट्रैफिक में बच्चों के लिए साइकिल से या पैदल जाना असुरक्षित है। इसलिए अब बच्चों को साइकिल से स्कूल भेजकर, अमेरिकी कोशिश कर रहे हैं कि उनके बच्चे, बचपन को भरपूर जिएं। अमेरिकी ‘लाइसेंस्ड प्ले थेरेपिस्ट’ पर भी खर्च कर रहे हैं।

यह अमेरिकी स्कूलों में मशहूर पद है, जिसे हमारे माता-पिता और स्कूल प्रबंधन को देखना चाहिए। प्ले थेरेपिस्ट समझाते हैं कि बचपन के खेल या गेम्स का युवा जीवन पर कितना गहरा असर होता है। याद कीजिए, हम स्कूल से लौटते थे, यूनिफॉर्म बदलते थे, मां जो देती थीं वह खाते थे और फिर हमसे कहा जाता था कि बाहर जाकर खेलो लेकिन रात के खाने से पहले लौट आना। तब देखने के लिए स्क्रीन नहीं थी, दूरदर्शन तक नहीं।

कुछ घरों में रेडियो थे, लेकिन उसे बड़े ही सुनते थे। लेकिन अगर मैं पूछूं कि हम कौनसे खेल खेलते थे, तो शायद सभी याद न आएं। क्योंकि हम सिर्फ मज़े के लिए खेलते थे। ये प्ले थेरेपिस्ट आज सिखा रहे हैं कि गलतियां करो और खुद उनसे सीखो। अरे हम यही तो करते थे। हमारे खेलों का कोई तय खाका नहीं था।

ये खेल बच्चों के या कभी-कभी माता-पिता के निर्देशों पर चलते थे। फिर भी इनसे आत्मविश्वास, संवाद कौशल, रिश्ते सुधारने की क्षमता और समुदाय से जुड़ने की सीख मिलती थी। ये खेल एंग्जायटी की दवा की तरह थे।

आज माता-पिता चीजों को जटिल कर रहे हैं। वे बच्चों के जीवन में दखल देने के नए तरीके तलाशते रहते हैं। वे बच्चे के शेड्यूल या डेली टाइम टेबल में खाली समय नहीं रखते। ऐसा समय जब वे बाग में दौड़ सकें, टूटी शाख बटोर सकें, किसी क्रिकेटर या हॉकी प्लेयर जैसे एक्ट कर सकें। याद है, हममें से कुछ लोग समुद्री तटीय शहरों में पले-बढ़े हैं, जहां हम सीपियां बटोरते थे, जो हमें फिर नहीं दिखीं।

कृपया काम के बाद फोन अलग रखें और बच्चों के साथ ऐसे खेलों की ओर लौटें जिनमें दिमाग लगाने की जरूरत न हो। कुछ सीपियां खोजें और दो एक-सी सीपियां मिलने पर जोर से चीखें। ऐसे बिना नियम वाले खेलों से ही बच्चा बचपन को भरपूर जी पाएगा।

फंडा यह है कि बच्चों को गलतियां करने दें और उनसे सीखने दें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे गलतियां कर पाएं, इसके लिए उन्हें आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित माहौल दें। ऐसा माहौल हमारे खेलने के और स्कूल जाने के पुराने तरीकों से भी दिया जा सकता है।