Thursday, August 1, 2024

गेम्स और वीडियो से सीखने वाली जैन ज़ी को हल्के में न लें

 

एन. रघुरामन का कॉलम:गेम्स और वीडियो से सीखने वाली जैन ज़ी को हल्के में न लें

2 दिन पहले

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चलने वाली राजधानी इस सोमवार को मुंबई से तय समय से चार मिनट की देरी से छूटी, लेकिन इसने तुरंत गति पकड़ते हुए ज्यादातर जगहों पर इसे बरकरार रखा। मेरे सहयात्री ने नजरें उठाकर देखा भी नहीं।


वे लोग इंजन-बोगी पर बात करने में व्यस्त थे। एक कह रहा था, “ये सबसे लंबा इंजन है।’ दूसरे ने कहा, “नहीं। वैग 12 ही सबसे लंबा इंजन है।’ अगले एक घंटे में मैंने कई नए शब्द सुने जैसे डब्ल्यूडीजी-थ्रीए, वैप-7, वैप-4 (अलग-अलग इंजन), इसमें वंदे भारत के इंजन-कोच के नाम भी थे जैसे उत्कृष्ट, आईसीएफ रेड, क्लासिक-एस (शताब्दी का इंजन), क्लासिक-आर (राजधानी कोच)। वे बात कर रहे थे कि किस वैगन में पशुओं को लाया ले जाता है।


उनकी बातें सुनकर मैं हक्का-बक्का था। वो इसलिए क्योंकि फर्स्ट एसी की उन दोनों सीटों पर बैठे वो लोग किसी को देख तक नहीं रहे थे। वे दोनों थे 12 वर्षीय अहान सक्सेना व दस वर्षीय उसका भाई विहान, जो कतर के बिड़ला पब्लिक स्कूल में कक्षा सातवीं व छठवीं के स्टूडेंट हैं। वे अपनी मां गरिमा के साथ यात्रा कर रहे थे।


कतर में पले-बढ़े होने के बावजूद, दोनों भाई भारतीय रेलवे की हरेक चीज जानते थे क्योंकि उन्होंने पूरे रेलवे की गाड़ियां चलाई हैं! आप ताज्जुब कर रहे होंगे कैसे? वे इंडियन रेलवे सिमुलेटर नाम का फ्री वीडियो गेम खेलते हैं, इसे टीम हाइकर्स ने डेवलप किया है, जहां ये भारतीय रेलवे सिस्टम की नकल करता है।


इससे ट्रेन चला सकते हैं। हर केबिन में वास्तविक जानकारी होती है और जब ट्रेन चलाते हैं तो थरथराने वाली ट्रैक की आवाज भी आती है। पहली नजर में देखने पर यह अच्छा गेम लगता है। हालांकि गेम खेलने वालों का अनुभव कुछ और कहानी कहता है।


बाकी खेलों की तरह इसमें कोई मिशन नहीं है, जहां विरोधी को मार गिराना होता है। इस तरह यह आपके गेमप्ले को केवल ट्रेन चलाने तक सीमित कर देता है। लेकिन भारत की भूगोल के बारे में एक गहन जानकारी देता है।


वे यही नहीं रुके। वे ज्यादातर स्टेशनों के नाम जानते थे और जैसे ही ट्रेन मुंबई पार करके माथेरान पहुंचने को थी, बड़ा भाई अहान बताने लगा कि कैसे ये हिल स्टेशन दिसंबर 2001 में हुए भीषण हत्याकांड के लिए भी जाना जाता है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था, इसमें पति ने पत्नी की हत्या करके उसका सिर कटा शरीर होटल के बाथरूम में छोड़ दिया था।


ना सिर्फ माथेरान के अपराध बल्कि वे बच्चे अमेरिका से लेकर भारत तक में हुई ज्यादातर आपराधिक वारदातों के बारे में जानते थे, क्योंकि वे रे विलियम जॉनसन के बनाए कार्यक्रम देखते हैं, जो सोशल मीडिया पर क्राइम शोज़ लेकर आए।


दिलचस्प रूप से जब मैंने उनसे हवाई यात्राओं का पूछा, तो उन्हें हर तरह के एयरक्राफ्ट, इंजन पावर, साइज, यात्री क्षमता, उसके निर्माणकर्ता का नाम भी मालूम था। उनकी मां मुझे बता रही थीं कि किसी भी यात्रा पर जाने से पहले, बच्चे गूगल करते हैं, साइट सीइंग करते हैं और वर्चुअल स्पेस में उपलब्ध ज्ञान का हर टुकड़ा सहेजते हैं।


फिर वे वास्तविक जीवन में अपने अनुभव से उसे जोड़ते हैं। सच कहूं तो वे भी मोबाइल किड्स थे, लेकिन केवल तब, जब वे ऐसी जानकारी खोजना चाहते थे जो उन्हें रुचि के चुने हुए क्षेत्र में बुद्धिमान बना सके। गर्व से भरी उनकी मां ने कहा कि इंटरनेट पर कुछ भी करने से मैं उन्हें नहीं रोकती, हां, बस इसका ध्यान रखती हूं कि सब कुछ मेरी आंखों के सामने हो।


फंडा यह है कि अगर जेन ज़ी किताबें नहीं छू रही है, तो पढ़ने के लिए उन पर दबाव न बनाएं, बस उनकी उत्सुकता बनाए रखने के तरीके ईजाद करें और हर चीज जानने की भूख पैदा करें। क्या फर्क पड़ता है, अगर वे मोबाइल गेम्स या सोशल साइट से सीख रहे हैं, आखिरकार यह ज्ञान ही तो है।