Friday, May 3, 2024

There is nothing for free

 ज्यादा से ज्यादा हुनर सीखें, अपने सीखने में मूल्यों को शामिल करें, दुनिया को बेहतर तरीके से जानें, वैकल्पिक नई नौकरी की भूमिकाएं जानें, जिनमें आप फिट हो सकते हैं और संक्षेप में अपने और अपने कौशल की बेहतर कीमत पाने के लिए खुद को और कीमती बनाएं। इससे आप इतने संपन्न हो जाएंगे कि कल को मुफ्त की चीजें बंद भी हो जाएं तो कनेक्टिविटी जैसी चीजें पैसे देकर भी ले सकेंगे। फिजूल के वीडियोज या इंस्टा पर रील्स स्क्रॉल करने में डाटा और कीमती वक्त न गंवाएं।

फंडा यह है कि जीवनभर कुछ भी फ्री या सब्सिडी पर नहीं मिलता रहेगा। आकस्मिक योजना रखें कि यदि मुफ्त की चीजें अचानक बंद हो जाएं तो उन जरूरतों की पूर्ति कैसे करेंगे।

Bachpan ko kaise jiye

 


क्या आप चाहते हैं कि बच्चा बिस्तर से उछलकर उठे और स्कूल जाए? जवाब आसान है। उन्हें जड़ों से जोड़ें। न्यूयॉर्क शहर से 17 किमी दूर, मोंटक्लेयर नामक जगह यही कर रही है। उन्होंने बच्चों की छोटी साइकिलों को ‘बाइक बस’ नाम दिया है, जो पीले रंग के कारण बस जैसी दिखती हैं।Ads by

बच्चे बीच शहर की एक तय जगह से 3.5 किमी दूर स्कूल जाते हैं। चूंकि बच्चे अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, इसलिए वे पहले एक जगह इकट्ठा होते हैं। फिर यहां से वे ‘बाइक बस’ से 20 मिनट के सफर पर निकलते हैं।

शुरुआत में वे हफ्ते में एक दिन ऐसा करते है। इस पहल के ज़रिए माता-पिता को लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में स्थायी बदलाव की राह खुलेगी और शहर में बेहतर क्रॉसवाक, बाइक के लिए अलग लेन बन पाएंगी और ऐसा समय या दिन तय किए जा सकेंगे जब मोटर गाड़ियां न चलें।

बाइक बस का आइडिया बार्सिलोना, स्पेन में भी है। साल 1960 में कम से कम 50% अमेरिकी छात्र साइकिल से स्कूल जाते थे। ये आंकड़ा 2009 में गिरकर 13% हो गया और 2024 में इसके एक अंक में पहुंचने का अंदेशा है।

गिरावट के पीछे माता-पिता का डर है कि मौजूदा ट्रैफिक में बच्चों के लिए साइकिल से या पैदल जाना असुरक्षित है। इसलिए अब बच्चों को साइकिल से स्कूल भेजकर, अमेरिकी कोशिश कर रहे हैं कि उनके बच्चे, बचपन को भरपूर जिएं। अमेरिकी ‘लाइसेंस्ड प्ले थेरेपिस्ट’ पर भी खर्च कर रहे हैं।

यह अमेरिकी स्कूलों में मशहूर पद है, जिसे हमारे माता-पिता और स्कूल प्रबंधन को देखना चाहिए। प्ले थेरेपिस्ट समझाते हैं कि बचपन के खेल या गेम्स का युवा जीवन पर कितना गहरा असर होता है। याद कीजिए, हम स्कूल से लौटते थे, यूनिफॉर्म बदलते थे, मां जो देती थीं वह खाते थे और फिर हमसे कहा जाता था कि बाहर जाकर खेलो लेकिन रात के खाने से पहले लौट आना। तब देखने के लिए स्क्रीन नहीं थी, दूरदर्शन तक नहीं।

कुछ घरों में रेडियो थे, लेकिन उसे बड़े ही सुनते थे। लेकिन अगर मैं पूछूं कि हम कौनसे खेल खेलते थे, तो शायद सभी याद न आएं। क्योंकि हम सिर्फ मज़े के लिए खेलते थे। ये प्ले थेरेपिस्ट आज सिखा रहे हैं कि गलतियां करो और खुद उनसे सीखो। अरे हम यही तो करते थे। हमारे खेलों का कोई तय खाका नहीं था।

ये खेल बच्चों के या कभी-कभी माता-पिता के निर्देशों पर चलते थे। फिर भी इनसे आत्मविश्वास, संवाद कौशल, रिश्ते सुधारने की क्षमता और समुदाय से जुड़ने की सीख मिलती थी। ये खेल एंग्जायटी की दवा की तरह थे।

आज माता-पिता चीजों को जटिल कर रहे हैं। वे बच्चों के जीवन में दखल देने के नए तरीके तलाशते रहते हैं। वे बच्चे के शेड्यूल या डेली टाइम टेबल में खाली समय नहीं रखते। ऐसा समय जब वे बाग में दौड़ सकें, टूटी शाख बटोर सकें, किसी क्रिकेटर या हॉकी प्लेयर जैसे एक्ट कर सकें। याद है, हममें से कुछ लोग समुद्री तटीय शहरों में पले-बढ़े हैं, जहां हम सीपियां बटोरते थे, जो हमें फिर नहीं दिखीं।

कृपया काम के बाद फोन अलग रखें और बच्चों के साथ ऐसे खेलों की ओर लौटें जिनमें दिमाग लगाने की जरूरत न हो। कुछ सीपियां खोजें और दो एक-सी सीपियां मिलने पर जोर से चीखें। ऐसे बिना नियम वाले खेलों से ही बच्चा बचपन को भरपूर जी पाएगा।

फंडा यह है कि बच्चों को गलतियां करने दें और उनसे सीखने दें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। वे गलतियां कर पाएं, इसके लिए उन्हें आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित माहौल दें। ऐसा माहौल हमारे खेलने के और स्कूल जाने के पुराने तरीकों से भी दिया जा सकता है।

डार्क कहानियां भी पढ़ना-जानना जरू


अब तो चोरियां भी सफाई के मामले में अलग मुकाम पर पहुंच गई हैं! यहां एक ऐसी लूट की कहानी है जो कई बड़ी कंपनियों की नाक के नीचे हो रही थी और वे इससे अनजान थे क्योंकि इसे खुद कंपनी के कर्मचारी कर रहे थे।


ब्रिटेन में कर्मचारियों द्वारा पिछले एक साल में तकरीबन 3.3 अरब पाउंड (34 हजार करोड़ रु.) की कीमत की चोरी हुई। बोल्टन, ब्रिटेन में मैनचेस्टर के करीब एक जगह है जहां एक हजार कर्मचारी एमेजॉन के रोबोट-संचालित गोदाम में ऑर्डर लेते व पैक करते हैं। यहां कन्वेयर बेल्ट 8 किमी लंबे हैं।


आप समझ गए होंगे कि यहां किस स्तर पर काम होता है। 25 वर्षीय अरबाज जफर वहां काम करता था। उसकी तरह तमाम कर्मचारियों की अंदर-बाहर जाने पर चेकिंग होती है। वह एक पिन भी अंदर या बाहर नहीं ला सकता क्योंकि चौबीसों घंटे कैमरे की नजर रहती है। फिर भी उसे दिसंबर व फरवरी के बीच गोदाम से 46 आईफोन चुराने का दोषी पाया गया और कोर्ट में सजा सुनाई गई।


सिर्फ वही नहीं, पिछले महीने तीन अन्य स्टाफ को गोदाम से 78.75 लाख रु. के स्मार्टफोन व इलेक्ट्रॉनिक्स चोरी करते हुए पकड़ा गया! खुद जफर ने बिना सुराग छोड़े 67,75,860 रु. कीमत के आईफोन चुराए।


आप जानने को बेताब होंगे कि चोरी करने का यह कौन-सा तरीका है, आगे पढ़ें। वे लोग अपने लिए किताब जैसी छोटी चीज ऑर्डर करते थे, फिर पैकेजिंग में आईफोन रख देते थे और अपने घर के पते का लेबल लगा देते थे। बस उन्होंने एक गलती की कि अपने असली घर का पता लिख दिया।


जफर के घर की तलाशी में एमेजॉन के पैकेट्स और 26.25 लाख रु. नकद मिले। रीटेल स्टोर्स को चोरी से बचने के लिए सुरक्षा व टेक्नोलॉजी पर भारी खर्च करना पड़ता है, फिर भी कई दुकानों से चोरी में 49 हजार करोड़ रु. का नुकसान हुआ।


इसमें 34 हजार करोड़ का नुकसान तो सिर्फ कर्मचारियों द्वारा की गई चोरी से हुआ। मार्क एंड स्पेंसर, क्रिस्टियां डियॉ, नेक्स्ट और यहां तक कि हैरड्स जैसे स्टोर में भी कर्मचारियों को खुद को क्रेडिट नोट जारी करते हुए, या अपने लिए लाखों के हैंडबैग-आफ्टरशेव चोरी करते देखा गया।


ये कैसे हो रहा है? क्योंकि, इस लूट में एक और पेंच है। हम भलीभांति जानते हैं कि कई स्टोर्स में स्थाई भुगतान में कटौती करने के लिए गिग वर्कर (अस्थायी कर्मचारी) रखना आम बात हो गई है, जिन्हें पीएफ या हेल्थ जैसी बाकी दुर्घटनाओं में कोई इंश्योरेंस का फायदा नहीं देना पड़ता।


गिग कामगारों को रखते समय कई कंपनियां भी बैकग्राउंड चेक करना छोड़ देती हैं क्योंकि उन्हें भी काम के दबाव को कम करने के लिए वे कर्मचारी एक दिन या कुछ हफ्तों के लिए चाहिए होते हैं। ऐसे अपराधों का अध्ययन करने वाले सुरक्षा विशेषज्ञों और अकादमिक अध्ययनकर्ताओं को लगता है कि इन गिग कर्मचारियों की सप्लाई, चोरी आदि का विधिवत प्रशिक्षण देने के बाद संगठित माफिया करते हैं।


इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ कहते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ने से वितरण केंद्रों पर कर्मचारियों द्वारा चोरी की वारदातें नाटकीय गति से बढ़ी हैं। विक्रेता खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं, वे कर्मचारियों की जांच करने में विफल रहते हैं, नतीजतन गिरोह सप्लाई चेन में सेंधमारी करने में सफल हो जाते हैं।


अमेरिका जैसे देशों में लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में काम करने वाले हर व्यक्ति को ऐसी डार्क कहानियां बताई जाती हैं, ताकि वे भी ऐसे कोई सेंधमारी पकड़ सकें। यह वितरण व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को अलर्ट रखता है।


फंडा यह है कि एक पेशेवर के रूप में यदि आप वास्तविकता से बचते हैं (समाज में होने वाली घटनाएं, वह भी आपके क्षेत्र में) तो फिर उसके परिणामों से नहीं बच सकते।