Sunday, October 15, 2023

Knowledge of coffee

 

एन. रघुरामन का कॉलम:आज के युवाओं को उनके ही गेम में कैसे हराएं?

10 घंटे पहले
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु  - Dainik Bhaskar
एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 

वे 70 वर्ष से अधिक की हैं और खासी रोमांटिक हैं! अगर आप उनसे पूछें कि फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में उन्हें क्या पसंद आया तो वे कहेंगी, उसकी टैगलाइन जो कहती है कि ‘सभी को किसी न किसी से, किसी न किसी तरह प्यार हो ही जाता है!’

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पिछले महीने हुई वर्ल्ड कॉफी कॉन्फ्रेंस के लिए अपनी बेंगलुरु यात्रा में मुझे बेंगलुरु में रहने वाली 73 वर्षीय सुधा मूर्ति की याद आई। अगर युवाओं से जुड़े रहने के लिए फिल्में देखना उनका पैशन है तो कॉफी की जानकारी रखना मेरा। बड़ी संख्या में भारतीय युवा अब कॉफी पर शिफ्ट हो रहे हैं, क्योंकि हाथ में कॉफी कप से उन्हें ‘बैज वैल्यू’ यानी स्टेटस वाली फीलिंग आती है।

मेरी बात पर यकीन न हो तो एयरपोर्ट पर जाकर देखें। आश्चर्य नहीं कि कोका-कोला के स्वामित्व वाले कोस्टा कॉफी ने हाल ही में 150वां स्टोर खोला है। इसलिए आज के युवाओं से आगे रहने के लिए मैं कॉफी की स्टडी करता हूं। अधिकतर कॉफी उत्पादक विशिष्ट स्वाद-उसकी रिचनेस का हवाला देते हैं, वहीं मुझे पता है भौगोलिक फैक्टर इसमें अंतर पैदा करते हैं।

जैसे पापुआ न्यू गिनी जैसे ऊष्णकटिबंधीय देश की कॉफी का स्वाद अलग होता है, क्योंकि उनकी जलवायु शुष्क व नम है और वहां कॉफी ऊंचाई पर पैदा होती है। कोलम्बिया इकलौता ऐसा देश है, जिसके 22 राज्य 22 प्रकार की कॉफी पैदा करते हैं। वहां पहाड़ों व मैदानों में कॉफी उगाते हैं।

दक्षिण भारत के अलावा अगर कोई ऐसी जगह है, जहां लोग पानी जैसी कॉफी पीते हैं तो वो है वियतनाम। वे दिन की शुरुआत व अंत कॉफी से करते हैं और इससे नींद में भी खलल नहीं आता। मैंने पहली बार कम्बोडिया में वियतनामी कॉफी चखी थी और उसके लिए रात में यात्रा की थी! कॉन्गो की कुछ रोबस्टा इतनी यूनीक होती हैं कि दुनिया में कहीं और नहीं पाई जातीं।

अगर सुधा मूर्ति फिल्मों पर बात कर सकती हैं तो मैं भी कॉफी के नॉलेज से मेहमानों का मनोरंजन कर सकता हूं। मिसाल के तौर पर मैं उन्हें एस्प्रेसो (बेहतरीन तरीके से पीसे कॉफी बीन्स पर गर्म पानी ब्रू करके निर्मित) से लंगो (यह भी एस्प्रेसो जैसी होती है, पर पानी दोगुना होता है); रीस्ट्रेट्टो (कम पानी की सघन एस्प्रेसो); कोर्टाडो (समान पानी-गर्म दूध वाली स्पैनिश मूल की कॉफी, जिसे छोटे गिलास में देते हैं); डोप्पियो (एस्प्रेसो के दो शॉट्स, क्योंकि इतालवी में डोप्पियो मतलब दो होता है); वियना (इसे एस्प्रेसो व व्हिप्ड क्रीम के साथ बनाते हैं, पर दूध-चीनी नहीं होती); कपूचीनो (यह भी एस्प्रेसो-आधारित ड्रिंक है, जिसे समान मात्रा वाले एस्प्रेसो, स्टीम दूध-फोम से बनाते हैं, इसे छोटे कप में देते हैं और ऊपर कोकोआ या इलायची पावडर छिड़कते हैं); लैटे (यह भी एस्प्रेसो आधारित ड्रिंक है, जिसे स्टीम किए दूध, एस्प्रेसो व ऊपर थोड़े फोम के साथ बनाते हैं, इसे वनीला या करामेल से फ्लैवर्ड कर सकते हैं); फ्लैट व्हाइट (यह भी लैटे जैसी है, पर इसमें कॉफी का कंसंट्रेशन अधिक व दूध कम होता है, जिससे स्वाद स्ट्रॉन्ग होता है); अफोगातो (ये एक तरह की डेसर्ट-कॉफी है, इसे वनीला आइस्क्रीम के एक स्कूप पर एस्प्रेसो के शॉट से बनाते हैं ताकि खाने के बाद मीठे की तरह पी सकें) अंत में आइस्ड कॉफी (इसके कुछ वैरियंट्स होते हैं, जिनमें से कुछ में दूध के बजाय पानी होता है, आवश्यकतानुसार फ्लैवर्ड सीरप भी डालते हैं) के बारे में बता सकता हूं। हालांकि मुझे इससे भी ज्यादा कॉफी के बारे में मालूम है, तब भी मैं घर पर दक्षिण भारतीय काप्पी का ही आनंद लेता हूं।